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शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, 82 स्टॉक्स पहुंचे साल के निचले स्तर पर

शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, 82 स्टॉक्स पहुंचे साल के निचले स्तर पर

शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, 82 स्टॉक्स पहुंचे साल के निचले स्तर पर

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एडमिन8 जून 2026, (अपडेटेड 11:15 am)

भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। सोमवार को NIFTY50 और SENSEX दोनों प्रमुख सूचकांकों में तेज बिकवाली देखने को मिली और दिन के कारोबार के दौरान दोनों इंडेक्स 1.1 प्रतिशत से अधिक टूट गए। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में कमी ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया। इस गिरावट का सबसे बड़ा असर कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों पर पड़ा, जिनमें Reliance Industries, TCS, Wipro, Swiggy, RVNL और अन्य दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।

बाजार में यह कमजोरी ऐसे समय देखने को मिली जब ईरान और इजरायल के बीच अप्रैल में हुए युद्धविराम के बावजूद एक बार फिर सैन्य कार्रवाई की खबरें सामने आईं। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी। निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

ईरान और इजरायल के बीच नए हमलों की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 5 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें देश की अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट मुनाफे पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। यही कारण है कि निवेशकों ने बाजार में मुनाफावसूली और बिकवाली को प्राथमिकता दी।

इस गिरावट के दौरान NSE पर कुल 82 शेयर अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर तक पहुंच गए। इनमें कई बड़ी और चर्चित कंपनियां शामिल थीं। Reliance Industries, जो भारतीय शेयर बाजार की सबसे मूल्यवान कंपनियों में गिनी जाती है, दबाव में रही। इसी तरह आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां TCS और Wipro भी बिकवाली की चपेट में आ गईं। निवेशकों ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और संभावित मांग में कमजोरी को देखते हुए टेक्नोलॉजी शेयरों में भी सतर्क रुख अपनाया।

रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की कंपनी RVNL के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। पिछले कुछ वर्षों में रेलवे शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन हालिया बाजार दबाव के कारण इस क्षेत्र में भी मुनाफावसूली बढ़ी है। वहीं नई पीढ़ी की टेक और इंटरनेट कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे, जिससे निवेशकों का विश्वास कुछ हद तक प्रभावित हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान गिरावट केवल घरेलू कारकों का परिणाम नहीं है, बल्कि इसका संबंध वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से भी है। अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव, ऊर्जा कीमतों में तेजी और वैश्विक विकास दर को लेकर चिंताओं ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है। ऐसे माहौल में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भी उभरते बाजारों से पूंजी निकालने का फैसला कर सकते हैं, जिससे भारतीय बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में आई यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकती है। मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों के शेयर आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध हो सकते हैं। लेकिन निकट अवधि में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे घबराहट में निर्णय लेने से बचें और अपने निवेश पोर्टफोलियो की समीक्षा करें। उच्च गुणवत्ता वाली कंपनियों में लंबी अवधि का निवेश अभी भी बेहतर रणनीति मानी जा रही है। साथ ही भू-राजनीतिक घटनाओं और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।

यदि ईरान-इजरायल तनाव और बढ़ता है तथा तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता कुछ समय तक बनी रह सकती है। वहीं यदि स्थिति में सुधार आता है, तो बाजार में रिकवरी की संभावना भी मजबूत हो सकती है। फिलहाल निवेशक आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक संकेतकों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।



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