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ट्रंप ने भारत और चीन पर 100% टैरिफ पर हस्ताक्षर किए

US President Donald Trump signing Russia sanctions bill threatening 100 percent secondary tariffs on India and China

US President Donald Trump signing Russia sanctions bill threatening 100 percent secondary tariffs on India and China

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Ushnish Sharmaनई दिल्ली, 19 सितंबर 2026, (अपडेटेड 02:42 am)

US President Donald Trump ने जारी Ukraine War के बीच एक बेहद कड़े Russia sanctions bill पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया है। इस नए कानून के तहत उन देशों पर नकेल कसने की तैयारी की गई है जो प्रतिबंधित रूसी ऊर्जा संसाधनों का आयात जारी रखे हुए हैं। इस कदम से India और China जैसे प्रमुख देशों पर 100% तक secondary tariffs लगाए जाने का कानूनी रास्ता साफ हो गया है, जिससे वैश्विक व्यापार में नए तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।

इस Sanctions Bill के तहत US प्रशासन को क्या शक्तियां मिली हैं?

White House द्वारा पारित इस कानून के माध्यम से अमेरिकी राष्ट्रपति को व्यापक अधिकार दिए गए हैं:

  • Secondary Tariffs का अधिकार:  राष्ट्रपति अब उन देशों के उत्पादों पर 100% तक का अतिरिक्त इंपोर्ट शुल्क लगा सकते हैं जो रूस से crude oil या प्राकृतिक गैस खरीदकर उनकी अर्थव्यवस्था को समर्थन दे रहे हैं।

  • Trade Penalties का प्रावधान:  कानून के अनुसार, यदि कोई देश अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों का उल्लंघन करता है, तो उसके द्विपक्षीय व्यापार पर कड़ी पाबंदियां लागू की जा सकती हैं।

India और China पर इस फैसले का क्या असर पड़ सकता है?

रूस और यूक्रेन संघर्ष की शुरुआत के बाद से भारत और चीन रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदार बनकर उभरे हैं:

  1. भारत के लिए व्यापारिक चुनौती:  भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए रूस से रियायती दरों पर crude oil आयात करता रहा है। यदि अमेरिका 100% tariff लागू करता है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो सकता है।


  2. चीन पर संभावित दबाव:  बीजिंग पहले से ही वाशिंगटन के साथ व्यापारिक विवादों का सामना कर रहा है, और यह नया प्रतिबंध दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है।

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इस नए विधेयक पर White House और वैश्विक कूटनीतिज्ञों का क्या कहना है?

Donald Trump प्रशासन का तर्क है कि यह कठोर कदम मास्को के राजस्व तंत्र को तोड़ने और युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से उठाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जब तक रूस सैन्य कार्रवाई रोकता नहीं, तब तक वित्तीय सहयोग देने वाले राष्ट्रों को इसका आर्थिक मूल्य चुकाना होगा। वहीं, अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच आगामी द्विपक्षीय वार्ता के दौरान इस मुद्दे पर रणनीतिक छूट (waivers) हासिल करने पर गहन चर्चा होगी।



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