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सेकेंड हैंड फोन लेने से पहले सावधान, ये गलती की तो होगा पछतावा

सेकंड हैंड फोन खरीदने से पहले डिस्प्ले स्क्रीन और स्क्रीन बर्न टेस्ट करने का आसान तरीका, पुरानी मोबाइल शॉपिंग टिप्स।

सेकंड हैंड फोन खरीदने से पहले डिस्प्ले स्क्रीन और स्क्रीन बर्न टेस्ट करने का आसान तरीका, पुरानी मोबाइल शॉपिंग टिप्स।

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Vivekनई दिल्ली, 16 सितंबर 2026, (अपडेटेड 06:07 am)

आज कल भारत के बाजारों में लोग नए मोबाइल फोने खरीदने से पहले सेकेंड हैंड फोने (Second-hand Smartphone) की ओर रुख करते हैं. जिससे उनके पैसों की बचत होती है साथ में ही कम पैसों में अच्छी क्वालिटी का स्मार्ट फोन भी उन्हें मिल जाता है बकायदा इसके लिए कई ऑनलाइन Application भी उपलब्ध हैं जहां मोबाइल बेचने वाले और खरीदने वाले दोनों आपस में बात करके एक फाइनल डील तक पहुंचते हैं. लेकिन इन सबके बीच जरूरी है आप जो सेकेंड हैंड फोने (Second-hand Smartphone) खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं. तो क्या वो आपको अच्छी क्वालिटी में मिल भी रहा है या आप किसी फ्रॉड का शिकार तो नहीं हो रहे.

कई सारे भरोसेमंद Online Refurbished Platforms जैसे Cashify, Flipkart Reset, Amazon Renewed और स्थानीय Offline Local Markets में बहुत कम कीमत पर शानदार फीचर्स वाले पुराने फोन आसानी से मिल जाते हैं। दिखने में ये फोन बिल्कुल नए जैसे लग सकते हैं और इनकी कीमत भी काफी आकर्षक होती है। लेकिन अगर आप मोबाइल लेने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान नहीं देते तो आपको फायदा होने की बजाय भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. दरअसल, जब भी आप कोई पुराना फोन खरीदते हैं तो उसकी चमक धमक पर ही ध्यान ना दें बल्कि फोन के अंदर भी कई महत्वपूर्ण चीजें होती हैं. जिनपर ध्यान देना काफी जरूरी होता है. आइए हम आपको बताते हैं कि सेकेंड हैंड मोबाइल लेने से पहले किन बातों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.

Display Screen

किसी भी मोबाइल का सबसे महंगा और संवेदनशील हिस्सा मोबाइल की Display Screen होती है. क्योंकि अगर मोबाइल के इस पार्ट में कोई दिक्कत होती है तो पूरा मोबाइल यूजर्स को प्रभावित कर सकता है. बकायदा इसके लिए भारी कीमत भी बाजार में देनी पड़ सकती है इसके साथ ही नकली स्क्रीन भी बाजार में काफी लोग बेचते हैं तो आपको टच के दौरान भी परेशानी आ सकती है. इसलिए, सेकंड हैंड फोन की डीलिंग करते समय स्क्रीन टेस्ट करना सबसे महत्वपूर्ण स्टेप माना जाता है। आज के आधुनिक स्मार्टफोन्स में AMOLED, Super AMOLED या High Refresh Rate LCD Displays आती हैं, जिनको ठीक करवाना काफी महंगा होता है.

स्क्रीन टेस्ट जरूरी क्यों हैं ?

दरअसल, मोबाइल बेचने से पहले कई दुकानदार नकली डिस्पले डालकर ग्राहकों को लूटने का काम करते हैं. उस समय ग्राहक केवल मोबाइल को ऊपर ऊपर से देखकर प्रभावित होते हैं. लेकिन कुछ दिनों के बाद ही नकली डिस्पले खराब हो जाती है. जिसका खामियाजा बाद में भारी कीमत चुकाकर भुगतना पड़ता है. जब आप खुद अपने हाथों से Screen Testing Process से गुजरते हैं, तो आपको डिस्प्ले की ब्राइटनेस, कलर एक्यूरेसी, टच सेंसिटिविटी और उसकी पिक्सेल क्वालिटी का सही अंदाजा मिल जाता है। यह छोटी सी सावधानी आपको एक खराब और डिफेक्टिव फोन खरीदने से बचा सकती है और आपकी मेहनत के पैसे सुरक्षित रख सकती है।

जाने, स्क्रीन बर्न (Screen Burn) क्या होता है और ये कैसे प्रभावित करता है?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब भी आप किसी एक मोबाइल को लंबे समय तक अधिक ब्राइटनेस के साथ इस्तेमाल करते हैं तो डिस्पले के कुछ पिक्सेल कमजोर या फिर कहें की परमानेंट डैमेज हो जाते हैं. इसी तकनीकी समस्या को Screen Burn-in या Ghost Image कहा जाता है. अधिकतर ये समस्या AMOLED Displays वाले फोन्स में देखी जाती है. यदि उनका इस्तेमाल सही से न किया गया हो।

अब हम आपको बताते हैं कि आप सेकंड हैंड फोन की स्क्रीन का आसान टेस्ट कैसे कर सकते हैं ?

अगर आप भी सेकेंड हैंड फोने (Second-hand Smartphone) लेने की प्लानिंग कर रहे हैं तो आप अपनी स्क्रीन का टेस्ट खुद कर सकते हैं. इसके लिए किसी बड़े टूल की जरूरत नहीं होती केवल मोबाइल में इंटरनेट होना चाहिए.

YouTube का इस्तेमाल करें- सबसे पहले सेकंड हैंड फोन में इंटरनेट कनेक्ट करें और YouTube खोलें। इंटरनेट कनेक्ट आप किसी वाई-फाई या फिर हॉट स्पॉट की मदद ले सकते हैं.

सर्च करें Test Videos: यूट्यूब के सर्च बार में जाएं और "White Screen Test" या "Grey Screen Test" टाइप करके वीडियो चलाएं। आप चाहें तो RGB Color Screen Test वीडियो भी प्ले कर सकते हैं जिसमें स्क्रीन बारी-बारी से लाल, नीली और हरी होती है।

सिंगल कलर मोड: जैसे ही आप व्हाइट या ग्रे स्क्रीन का वीडियो फुल स्क्रीन पर चलाएंगे, फोन की पूरी डिस्प्ले एक ही रंग में बदल जाएगी।

दोषों की पहचान: यदि स्क्रीन पर कोई पीलापन, काले या नीले धब्बे, अलग रंग का कोई हिस्सा, लाइनिंग या किसी पुराने ऐप/आइकन का निशान (Screen Burn) दिखाई दे रहा है, तो समझ जाइए कि फोन की डिस्प्ले में दिक्कत है।

इस आसान सी ट्रिक की मदद से आप सेकंड हैंड फोन खरीदने से पहले उसकी स्क्रीन की असल कंडीशन का बेहतर अंदाजा लगा सकते हैं।

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सीक्रेट सर्विस कोड्स की मदद लें

सिर्फ DISPLAY तक ही ध्यान ना दें आप कई सर्विस कोड्स की मदद से भी किसी फ्रॉड से बच सकते हैं. जैसे (*#0*#) का इस्तेमाल करके भी टच सेंसर, स्पीकर और डिस्प्ले के हर एक हिस्से की जांच कर सकते हैं.

इसके अलावा आप संभव हो सके तो मोबाइल का बिल जरूर हासिल करें ताकि आपको भविष्य में किसी कानूनी कार्रवाई का सामना ना करना पड़े. साथ ही *#06# के कोड से मोबाइल IMEI नंबर भी प्राप्त कर सकते हैं जोकि आपके मोबाइल और बिल पर एक जैसा ही होना चाहिए.

Vivek

About the Author: Vivek

Vivek is a dedicated journalist and reporter for HBN News 24, committed to bringing you the most accurate and fastest news updates from ground zero.

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