HBN News 24 Logo

सिगरेट का सेवन करने वालों के पास ना खड़े हों, क्योंकि..?

Second hand smoke dangers and passive smoking effects in India showing health risks from cigarette and tobacco smoke data research.

Second hand smoke dangers and passive smoking effects in India showing health risks from cigarette and tobacco smoke data research.

Author
Vivek19 सितंबर 2026, (अपडेटेड 07:54 am)

सिगरेट और तंबाकू का सेवन करने वाले लोग तो अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते ही हैं, लेकिन उनके आसपास रहने वाले लोग भी बिना सिगरेट पिए इस जहरीले धुएं के गंभीर शिकार हो जाते हैं। इसे 'सेकेंड हैंड स्मोक' (Second-Hand Smoke) या पैसिव स्मोकिंग कहा जाता है। हाल ही में सामने आई एक नई और चौंकाने वाली स्टडी के मुताबिक, साल 2023 में अकेले भारत में करीब 44.4 करोड़ लोग सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में आए हैं। यह आंकड़ा यह सोचने पर मजबूर करता है कि जो लोग खुद तंबाकू या सिगरेट को हाथ भी नहीं लगाते, वे भी दूसरों की बुरी आदत की वजह से कितने बड़े स्वास्थ्य जोखिम का सामना कर रहे हैं।

भारत, चीन और इंडोनेशिया में सबसे ज्यादा प्रभाव

ग्लोबल स्तर पर बात करें तो साल 2023 में दुनियाभर में लगभग 271 करोड़ लोग इस तरह के धुएं से प्रभावित हुए हैं। रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, भारत के अलावा चीन और इंडोनेशिया ऐसे देश हैं जहाँ सबसे बड़ी संख्या में लोग सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में पाए गए हैं। दुनिया भर के कुल प्रभावित लोगों का एक बहुत बड़ा हिस्सा इन्हीं तीन देशों में मौजूद है। इसका मुख्य कारण इन देशों की घनी आबादी और सार्वजनिक स्थानों पर स्मोकिंग से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन न होना माना जा सकता है।

Cigarette smoke health risks
Cigarette smoke health risks
भारत में 3 लाख से ज्यादा मौतों की वजह बना धुआं

यह स्टडी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने सेकेंड हैंड स्मोक और उससे होने वाली गंभीर बीमारियों के बीच के डरावने संबंधों को भी उजागर किया है। रिसर्च के मुताबिक, साल 2023 में भारत में 3 लाख से ज्यादा मौतें सीधे तौर पर सेकेंड हैंड स्मोक से जुड़ी थीं। सिर्फ जान जाने का ही सवाल नहीं है, बल्कि इसके कारण देश में 90 लाख से ज्यादा स्वस्थ जीवन के वर्ष (Healthy Life Years) प्रभावित हुए हैं, यानी लोग बीमारियों के साथ जीने को मजबूर हुए हैं।

इस जहरीले धुएं की वजह से शरीर में कई जानलेवा बीमारियां घर कर जाती हैं। इनमें मुख्य रूप से दिल की बीमारियां (Heart Diseases), फेफड़ों के गंभीर रोग, कैंसर, अस्थमा और टाइप-2 डायबिटीज जैसी समस्याएं शामिल हैं। यह रिसर्च 1990 से लेकर 2023 तक दुनिया के 204 देशों और क्षेत्रों के आंकड़ों का गहन अध्ययन करने के बाद सामने आई है, जो यह बताती है कि स्थिति कितनी गंभीर है।

बच्चों और महिलाओं पर मंडराता है सबसे बड़ा खतरा

सेकेंड हैंड स्मोक का यह घातक असर समाज के उन वर्गों पर सबसे ज्यादा पड़ता है जो खुद स्मोकिंग नहीं करते, जिनमें महिलाएं और छोटे बच्चे सबसे आगे हैं।

बच्चों पर प्रभाव: बच्चों पर इसका असर खास तौर पर ज्यादा खतरनाक होता है। कम उम्र में बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं, इसलिए तंबाकू के धुएं में मौजूद जहरीले और हानिकारक रसायन उनके नाजुक शरीर को बहुत जल्दी और गहराई से प्रभावित करते हैं। इससे बच्चों में सांस लेने में तकलीफ, बार-बार खांसी और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर परेशानियां तेजी से बढ़ने लगती हैं।

महिलाओं पर प्रभाव: रिसर्च में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्वी एशिया और ओशिनिया जैसे क्षेत्रों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में आने की संभावना 59 प्रतिशत तक ज्यादा होती है। घरेलू माहौल या अन्य सामाजिक कारणों से महिलाओं को अनचाहे ही इस धुएं का सामना करना पड़ता है, जिससे उनका स्वास्थ्य खतरे में पड़ जाता है।

ये भी पढ़ें- Passport New Rules: पासपोर्ट बनवाने के लिए नियमों में बदलाव, अब इन नियमों का पालन जरूरी


भले ही अनुपात घटा हो, लेकिन आबादी के कारण खतरा बरकरार

राहत की बात बस इतनी है कि पिछले कुछ दशकों में दुनिया भर में सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में आने वाले लोगों के अनुपात (Percentage) में कुछ कमी आई है। लोग अब पहले के मुकाबले थोड़े जागरूक हुए हैं। हालांकि, जनसंख्या में लगातार हो रही भारी बढ़ोतरी के कारण प्रभावित लोगों की कुल संख्या (Total Number) अभी भी बहुत ज्यादा बनी हुई है। इसका मतलब है कि खतरे का ग्राफ अभी भी नीचे नहीं आया है।

बचाव के लिए क्या है जरूरी?

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर कड़े कदम उठाने की जरूरत है। घर, ऑफिस, और हर प्रकार की सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान करने से पूरी तरह बचना चाहिए। अगर आपके परिवार में या आसपास कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है, तो उसके पास बैठने मात्र से भी धुएं के हानिकारक और जहरीले कण आपके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

इसलिए, यह हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है कि खुद तो धूम्रपान से दूर रहें ही, साथ ही अपने परिवार, बच्चों और आसपास के लोगों को भी इस जहरीले धुएं के प्रभाव से बचाएं। सार्वजनिक स्थलों पर कड़े कानूनों का पालन करवाना और लोगों को इसके प्रति जागरूक करना ही इस संकट से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता है।

Vivek

About the Author: Vivek

Vivek is a dedicated journalist and reporter for HBN News 24, committed to bringing you the most accurate and fastest news updates from ground zero.

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!