मोदी चालीसा का पाठ करना पढ़ा भारी, हुई बड़ी कार्रवाई

Bihar Transgender Welfare Board dissolved after Modi Chalisa controversy
इन दिनों देश की राजनीति में मोदी चालीसा Modi Chalisa controversy से जुड़ी खबरें काफी चर्चा में है क्योंकि इस पूरे मामले में बड़ी कार्रवाई भी की गई है और ये कार्रवाई किसी ओर ने नहीं NDA शासित प्रदेश सरकार की ओर से की गई है. दरअसल, बिहार सरकार ने राज्य किन्नर (ट्रांसजेंडर) कल्याण बोर्ड Bihar Transgender Welfare Board को भंग करने का बड़ा फैसला लिया है और इसको लेकर अधिसूचना भी जारी कर दी गई है.
आपको बता दें कि बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग ने एक अहम अधिसूचना जारी की जिसमें राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है. इस पूरे मामले में राज्य सरकार की ओर से जानकारी दी गई है कि केंद्र सरकार द्वारा 30 मार्च 2026 को अधिसूचित 'द ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026' के नए प्रावधानों के तहत बोर्ड का पुनर्गठन किया जाना आवश्यक हो गया था। हालांकि, इस प्रशासनिक कार्रवाई के बीच बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष राजन सिंह द्वारा पटना में 'मोदी मंदिर' बनाने के प्रस्ताव और दिल्ली में 'मोदी चालीसा' पाठ को लेकर उठा विवाद भी चर्चा में बना हुआ है।
पूरा मामला समझने से पहले एक बार फिर पूरा विवाद समझें, दरअसल
बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड भंग किए जाने के घटनाक्रम के बीच पूर्व उपाध्यक्ष डॉ.
राजन सिंह की ओर से उठाया गया एक कदम काफी चर्चा में रहा. उन्होंने जुलाई 2026
में पटना में 5 एकड़ भूमि पर करीब 112 करोड़ रुपये की लागत से प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी का मंदिर बनाने और उनकी स्वर्ण प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव
राज्य सरकार को भेजा था। इसके साथ ही, बोर्ड के सदस्यों ने दिल्ली में प्रेस
क्लब में 'मोदी चालीसा' का पाठ भी किया था।Modi Chalisa controversy जिसके बाद ही पूरा
मामला सुर्खियों में आया था.
इसके साथ खबर ये भी सामने आई की मंदिर निर्माण के प्रस्ताव को लेकर
बोर्ड के अंदर ही विरोध के स्वर उठने लगे थे। बोर्ड की सदस्य अनुप्रिया ने कहा था
कि मंदिर बनाने से जुड़ा कोई भी आधिकारिक प्रस्ताव बोर्ड की बैठक में पारित नहीं
हुआ था और यह राजन सिंह की निजी पहल थी। इसके साथ ही ट्रांसजेंडर समुदाय के
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी सवाल उठाया कि बोर्ड को धार्मिक विवादों के बजाय
समुदाय के मौलिक अधिकारों, रोजगार, स्वास्थ्य और
पुनर्वास जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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समाज कल्याण विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, बदलते कानूनी और सामाजिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए बोर्ड की संरचना में बदलाव आवश्यक था। हालांकि अगस्त 2025 में इस बोर्ड का पुनर्गठन 3 साल के कार्यकाल के लिए किया गया था, लेकिन नए केंद्रीय कानून के लागू होने के बाद राज्य में रहने वाले ट्रांसजेंडर समुदाय के विभिन्न वर्गों की न्यायसंगत भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मौजूदा बोर्ड को भंग कर नए सिरे से गठित करने का निर्णय लिया गया।
बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड के पुनर्गठन से जुड़ी मुख्य बातें:
• नए केंद्रीय कानून 2026 के अनुरूप संरचना: ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड का नया ढांचा केंद्रीय कानून 2026 के प्रावधानों के अनुसार तैयार किया जाएगा।
• सदस्यों के मनोनयन की प्रक्रिया: समाज कल्याण विभाग जल्द ही बोर्ड के नए अधिकारियों और सदस्यों को मनोनीत करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
• समुदाय का उचित प्रतिनिधित्व: पुनर्गठित बोर्ड में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों और ट्रांसजेंडर समुदाय के अलग-अलग वर्गों को सही प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
• पुराने बोर्ड की सदस्यता समाप्त: 7 अगस्त 2025 को गठित बोर्ड के सभी पदेन (ex-officio) और मनोनीत सदस्यों की सदस्यता तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई है।
• मुख्य उद्देश्य: नए बोर्ड का प्राथमिकता से काम ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना होगा।
About the Author: Vivek
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