सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) प्रमुख सुखबीर सिंह बादल को बड़ा झटका देते हुए उनके खिलाफ दर्ज 2017 की आपराधिक मानहानि शिकायत को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। बादल ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के अक्टूबर 2025 के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हाई कोर्ट ने भी शिकायत और मजिस्ट्रेट के समन आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया था।
मामला जनवरी 2017 के एक कथित बयान से जुड़ा है। उस समय पंजाब के उपमुख्यमंत्री रहे सुखबीर बादल ने धार्मिक संगठन अखंड कीर्तनी जत्था (AKJ) को कथित तौर पर आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल का राजनीतिक मोर्चा बताया था। शिकायतकर्ता ने खुद को AKJ का मुख्य प्रवक्ता बताते हुए इस बयान को मानहानिकारक बताया था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, बादल ने यह कथित टिप्पणी राजनीतिक रैलियों और मीडिया के सामने की थी, जिसके बाद इसे समाचार पत्रों में भी प्रकाशित किया गया। इसी आधार पर आपराधिक मानहानि की शिकायत दाखिल की गई थी।
सुखबीर बादल की याचिका पर सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने की। बादल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। सुनवाई के दौरान पीठ ने मामले में लगाए गए आरोपों और शिकायतकर्ता के संगठन से जुड़े दावे पर सवाल किए। इसके बाद अदालत ने बादल की याचिका खारिज कर दी।
बादल की ओर से यह भी तर्क दिया गया था कि शिकायतकर्ता को AKJ की ओर से शिकायत दर्ज कराने का अधिकार नहीं दिया गया था और कथित बयान पहली नजर में मानहानि का अपराध नहीं बनता। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों के आधार पर कार्यवाही रोकने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 2017 की आपराधिक मानहानि शिकायत पर निचली अदालत में कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ सकती है। हाई कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि उसकी टिप्पणियां केवल याचिका के निपटारे तक सीमित हैं और मजिस्ट्रेट शिकायत पर उसके गुण-दोष के आधार पर फैसला करेगा।
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