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राम भगवान अमीरों के, महादेव गरीबों के भगवान- सीएम रेड्डी

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का बयान। भगवान राम और शिव की तुलना को लेकर बीजेपी और कांग्रेस की राजनीति पर हिंदी न्यूज़।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का बयान। भगवान राम और शिव की तुलना को लेकर बीजेपी और कांग्रेस की राजनीति पर हिंदी न्यूज़।

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Vivekतेलंगाना, 29 सितंबर 2026, (अपडेटेड 05:49 am)

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उसकी हिंदुत्व की विचारधारा पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। दिल्ली में 'प्रतिदिन मीडिया नेटवर्क' के एक निजी कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके बयानों ने देश की राजनीतिक और धार्मिक संस्कृति को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद से सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी का दौर तेज हो गया है।

द्रविड़ संस्कृति और परंपराओं का जिक्र

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अपनी क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक जड़ों का मजबूती से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हम द्रविड़ हैं और हमारी अपनी अनूठी परंपराएं, मान्यताएं और गहरी सांस्कृतिक विरासत है। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिण भारत और देश के अन्य हिस्सों की धार्मिक आस्थाओं को एक ही चश्मे से नहीं देखा जा सकता। हमारी संस्कृति हमारी पहचान का अहम हिस्सा है, जिसे राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए। रेवंत रेड्डी के इस बयान को क्षेत्रीय अस्मिता और संस्कृति को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाने के एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।


Ram vs Shiva Politics
Ram vs Shiva Politics

भगवान के नाम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी

अपने संबोधन के दौरान सीएम रेवंत रेड्डी ने भगवान राम और भगवान शिव की मान्यताओं को लेकर एक तीखा तुलनात्मक बयान दिया। उन्होंने कहा कि हम भगवान शिव के सच्चे भक्त हैं, जबकि बीजेपी और उसके नेता खुद को भगवान राम के साथ ज्यादा जोड़कर देखते हैं। रेड्डी ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने एक तरह से भगवान राम को राजनीतिक प्रतीक के रूप में 'हथिया' लिया है। उनके अनुसार, भगवान राम हमारी आस्था, संस्कृति और आंतरिक भावनाओं से जुड़े हैं, लेकिन उनका उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।

'जय श्री राम' बनाम 'हर हर महादेव' की बहस

मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि बीजेपी के नेता हमेशा सार्वजनिक मंचों पर केवल 'जय श्री राम' के नारे क्यों लगाते हैं? क्या आपने कभी उन्हें किसी सार्वजनिक मंच पर 'हर हर महादेव' का नारा लगाते हुए देखा है? उन्होंने दावा किया कि जब हम 'हर हर महादेव' या भगवान शिव से जुड़े जयकारे लगाते हैं, तो राजनीतिक विरोधियों को यह बात रास नहीं आती। धार्मिक नारों के इस राजनीतिकरण पर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की।

'बीजेपी असल में अमीरों की पार्टी है...'

इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए रेवंत रेड्डी ने सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं को आर्थिक वर्ग से जोड़ते हुए एक नया राजनीतिक एंगल पेश किया। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को हमेशा गरीबों, शोषितों और आम जनमानस का देवता माना जाता है, जबकि भगवान राम के स्वरूप को आधुनिक राजनीतिक प्रचार में एक खास वर्ग से जोड़कर पेश किया जाता है।

इसी संदर्भ में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी असल में गरीबों की नहीं, बल्कि अमीरों की पार्टी है। उनकी यह सीधी और सरल राजनीतिक सोच है कि वे अपनी नीतियों और प्रतीकों के जरिए एक खास वर्ग को साधने का काम करते हैं

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सियासी गलियारों में हलचल और प्रतिक्रियाएं

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के इन बयानों के सामने आने के बाद से राष्ट्रीय राजनीति में सुगबुगाहट तेज हो गई है। बीजेपी के कई नेताओं ने उनके इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। विपक्षी दलों का मानना है कि ऐसे बयानों से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है और राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए आस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस समर्थकों और क्षेत्रीय दलों का एक वर्ग इसे वैचारिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक विविधता की रक्षा के रूप में देख रहा है। बहरहाल, आगामी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से रेवंत रेड्डी का यह बयान आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि धार्मिक प्रतीकों पर राजनीतिक अधिकार की यह बहस भारतीय राजनीति का एक पुराना और संवेदनशील अध्याय रही है।

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