प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान वहां के विपक्षी नेता से मुलाकात कर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी जैसे अहम विषयों पर विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री मोदी 8 जुलाई को इंडोनेशिया की यात्रा पूरी करने के बाद ऑस्ट्रेलिया पहुंचे थे। यह उनकी छह दिवसीय तीन देशों की यात्रा का दूसरा चरण है, जिसका उद्देश्य भारत के प्रमुख साझेदार देशों के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा देना है। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की तथा मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्व पर सहमति जताई। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल नवाचार, ऊर्जा, शिक्षा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है। दोनों पक्षों ने माना कि सरकारों, उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बढ़ता सहयोग भविष्य में दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा करेगा। ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड रवाना होंगे। वहां उनकी यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना, व्यापारिक अवसरों का विस्तार करना और दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संबंधों को और गहरा बनाना है। प्रधानमंत्री मोदी की यह विदेश यात्रा भारत की इंडो-पैसिफिक नीति को मजबूती देने, वैश्विक साझेदारियों को विस्तार देने और आर्थिक एवं रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।