Trump Xi Jinping Meeting किंग वेलकम के पीछे क्या है असल वजह?

US President Donald Trump Gives Personal Airport Welcome To Chinese President Xi Jinping Ahead Of High Stakes Summit In Washington On AI And Trade
Trump और Xi Jinping की बहुचर्चित मुलाकात: King जैसे स्वागत के पीछे क्या है US President की रणनीति?
अमेरिका और चीन के बीच चल रहे वैश्विक और व्यापारिक तनाव (US-China relations) के बीच एक हैरान कर देने वाला नज़ारा देखने को मिला। US President Donald Trump ने वाशिंगटन (Washington) के Andrews Air Force Base पर Chinese President Xi Jinping का व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया। अमेरिकी कूटनीति के इतिहास में राष्ट्रपति द्वारा हवाई अड्डे पर जाकर किसी विदेशी नेता का स्वागत करना एक दुर्लभ घटना मानी जाती है। इससे पहले ट्रंप ने व्लादिमीर पुतिन का भी ऐसे ही स्वागत किया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि दुनिया के दो सबसे ताकतवर देशों के बीच इस High-stakes Summit और इस तरह के 'King's Welcome' के पीछे क्या वजह है?
Donald Trump ने Xi Jinping का इतना भव्य स्वागत क्यों किया?
डिप्लोमेसी में हर छोटे कदम के बड़े मायने होते हैं। ट्रंप द्वारा हवाई अड्डे पर जाकर स्वागत करना, एक मजबूत व्यक्तिगत संबंध और सम्मान प्रदर्शित करने का तरीका माना जा रहा है। ट्रंप प्रशासन का मुख्य फोकस दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक नाजुक व्यापारिक समझौते (Trade Truce) को बचाना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) से जुड़े मुद्दों को सुलझाना है।
विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे अमेरिका के कॉरपोरेट जगत का भारी दबाव है। अमेरिकी कंपनियों के CEOs चाहते हैं कि चीन अपने बाजार को और अधिक खोले। ट्रंप ने खुद भी कहा था कि वह राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अमेरिकी कंपनियों को चीन में बिजनेस करने के लिए और मौके देने की मांग करेंगे, ताकि अमेरिकी उद्योगपति चीन में बेहतर तरीके से काम कर सकें।
इस US-China Summit के प्रमुख मुद्दे क्या हैं?
Trade and Tariffs (व्यापार और टैरिफ): अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर सबसे बड़ा मुद्दा है। दोनों देशों के बीच हुआ पिछला ट्रेड एग्रीमेंट (Trade Truce) नवंबर में समाप्त हो रहा है। ऐसे में इस बैठक में टैरिफ में राहत पर चर्चा हो सकती है।
Artificial Intelligence (AI): AI टेक्नोलॉजी में दोनों देशों की होड़ दुनिया के लिए चिंता का विषय है। हालांकि ट्रंप ने साफ किया है कि दोनों देश इस मुद्दे पर यथास्थिति (status quo) बनाए रखना चाहते हैं।
Iran and Geopolitics: अमेरिका के लिए एक बड़ी चिंता ईरान और चीन के बीच बढ़ती इंटेलिजेंस शेयरिंग है। अमेरिकी सेना पर हमलों में चीन द्वारा ईरान को इंटेलिजेंस मदद देने की रिपोर्ट्स सामने आई हैं, हालांकि ट्रंप ने इसे यह कहकर टाल दिया कि दोनों देश एक-दूसरे की जासूसी करते ही रहते हैं।
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क्या इस मुलाकात से कोई बड़ा समझौता होने की उम्मीद है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस भव्य स्वागत और तीन दिन तक चलने वाले आयोजनों (जिसमें व्हाइट हाउस में State Banquet भी शामिल है) के बावजूद, किसी बड़े और ठोस समझौते की उम्मीद कम ही है। चीन के प्रतिनिधिमंडल में बड़े CEOs शामिल नहीं हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि चीन बहुत सीरियस बिजनेस डील के मूड में नहीं है, बल्कि वह ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल खत्म होने तक समय काटने की रणनीति पर काम कर रहा है।
कुल मिलाकर, ट्रंप की कोशिश है कि वह घर में गिरती अप्रूवल रेटिंग और ईरान से बढ़ते तनाव से ध्यान हटाकर वैश्विक मंच पर अपनी 'स्ट्रॉन्ग लीडरशिप' की छवि को चमका सकें, वहीं चीन अपने आर्थिक हितों को बिना ज्यादा समझौता किए सुरक्षित रखना चाहता है।
About the Author: Ushnish Sharma
Ushnish Sharma is a dedicated journalist and reporter for HBN News 24, committed to bringing you the most accurate and fastest news updates from ground zero.
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