Reels देखने वाले ध्यान दें, नहीं तो होगा बुरा असर

इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स देखने की लत और हमारे दिमाग पर पड़ने वाले बुरे असर के बारे में जानकारी देता हुआ ग्राफिक्स।
आज के डिजिटल दौर में Instagram Reels, YouTube Shorts और दूसरे short-video platforms लोगों के मनोरंजन का आसान और तेज जरिया बन चुके हैं। कुछ सेकंड के वीडियो से शुरू होने वाला यह सिलसिला कई बार काफी देर तक चलता रहता है। यूजर एक वीडियो खत्म होते ही बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के अगले वीडियो पर पहुंच जाता है। यही लगातार बदलता कंटेंट लोगों को लंबे समय तक स्क्रीन पर बनाए रख सकता है।
लेकिन क्या लगातार शॉर्ट वीडियो देखने की आदत केवल हमारा समय बर्बाद करती है या इसका संबंध हमारे ध्यान, एकाग्रता और self-control से भी हो सकता है? हाल के वर्षों में इस सवाल पर वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का ध्यान बढ़ा है। कुछ रिसर्च में ज्यादा short-form video consumption और cognitive control से जुड़े व्यवहारों के बीच संबंध देखने को मिला है।
हर कुछ सेकंड में नया कंटेंट क्यों खींचता है ध्यान?
Short-video platforms की सबसे बड़ी खासियत उनका तेज और लगातार बदलता कंटेंट है। एक वीडियो कुछ सेकंड में खत्म होता है और तुरंत दूसरा वीडियो स्क्रीन पर आ जाता है। इसमें तेज विजुअल, बैकग्राउंड म्यूजिक, टेक्स्ट और अलग-अलग विषयों की जानकारी शामिल हो सकती है
इस तरह का कंटेंट यूजर का ध्यान बार-बार एक चीज से दूसरी चीज की तरफ ले जाता है। खासकर जब वीडियो व्यक्तिगत पसंद के हिसाब से लगातार दिखाए जाते हैं, तो स्क्रॉलिंग रोकना मुश्किल महसूस हो सकता है।
यही वजह है कि शोधकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि लगातार short-form content देखने की आदत cognitive control यानी दिमाग के नियंत्रण से जुड़ी क्षमताओं के साथ किस तरह संबंधित हो सकती है।
2026 की रिसर्च में क्या सामने आया?
2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में short-form video use और cognitive control के बीच संबंध की जांच की गई। ज्यादा short-video consumption करने वाले लोगों में attentional control और self-control से जुड़े प्रदर्शन के बीच नकारात्मक संबंध देखा गया।
शोधकर्ताओं ने इसके लिए Go/No-Go जैसे cognitive tasks का इस्तेमाल किया। इस तरह के टास्क का उद्देश्य यह जांचना होता है कि व्यक्ति किसी प्रतिक्रिया को जरूरत पड़ने पर रोक पाने में कितना सक्षम है। इसे inhibitory control से जोड़ा जाता है, जो executive functioning का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हालांकि, इस तरह के निष्कर्ष को यह मान लेना सही नहीं होगा कि शॉर्ट वीडियो देखने से सीधे तौर पर cognitive abilities खराब हो जाती हैं। रिसर्च में सामने आया संबंध कारण और परिणाम को साबित नहीं करता।
EEG स्टडी ने भी दिखाई कड़ी
2024 में प्रकाशित एक EEG-based study में 48 प्रतिभागियों को शामिल किया गया था। इसमें short-video addiction और दिमाग की गतिविधियों के बीच संबंध को समझने की कोशिश की गई।
रिसर्च में short-video addiction बढ़ने के साथ self-control और executive control से जुड़े brain signals में कमी के बीच संबंध देखा गया। Executive control हमारी उन मानसिक क्षमताओं का हिस्सा है, जिनकी मदद से हम किसी काम पर ध्यान बनाए रखते हैं, distractions को नजरअंदाज करते हैं और तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय सोच-समझकर निर्णय लेते हैं।
हालांकि, यहां भी शोध के निष्कर्षों को सावधानी से समझने की जरूरत है। सीमित प्रतिभागियों वाली स्टडी और cross-sectional research से लंबे समय के प्रभावों के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है।
पसंदीदा वीडियो ज्यादा देर तक रोक सकते हैं ध्यान
एक अन्य रिसर्च में 56 युवा वयस्कों के दिमाग की गतिविधियों को short videos देखते समय रिकॉर्ड किया गया। अध्ययन में अलग-अलग तरह के वीडियो के दौरान brain activity में होने वाले बदलावों को देखा गया।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिभागियों के पसंदीदा वीडियो देखने के दौरान self-control और cognitive control से जुड़े brain regions की activity में बदलाव दिखाई दिया। शोधकर्ताओं ने इसे attention और self-regulation से जुड़ी प्रक्रियाओं के संदर्भ में देखा।
इससे यह सवाल भी सामने आता है कि समस्या केवल कितने वीडियो देखे जा रहे हैं, यह नहीं है। वीडियो देखने का तरीका भी महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति बिना किसी उद्देश्य के लगातार scroll करता रहता है और बार-बार नया कंटेंट खोजता है, तो यह आदत उसके स्क्रीन टाइम को काफी बढ़ा सकती है।
क्या Reels और Shorts पूरी तरह नुकसानदायक हैं?
यह कहना जल्दबाजी होगी कि Instagram Reels या YouTube Shorts देखना अपने आप में दिमाग के लिए नुकसानदायक है। Short videos मनोरंजन के अलावा जानकारी, शिक्षा, खबरों और रचनात्मक कंटेंट का माध्यम भी हो सकते हैं।
मुख्य चिंता तब पैदा होती है जब short-video consumption जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए, व्यक्ति बार-बार फोन चेक करे या काम, पढ़ाई, नींद और दूसरी गतिविधियों के दौरान भी लगातार स्क्रॉल करने की इच्छा महसूस करे।
मौजूदा शोध मुख्य रूप से association की ओर इशारा करता है। यानी ज्यादा या problematic short-video use और attention तथा self-control से जुड़े कुछ संकेतों के बीच संबंध देखा गया है। इससे यह साबित नहीं होता कि short videos ही इन बदलावों का एकमात्र कारण हैं।
स्क्रीन टाइम कम करने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके
अगर आपको लगता है कि Reels या Shorts देखते हुए समय का अंदाजा नहीं रहता, तो कुछ छोटे बदलाव किए जा सकते हैं। सबसे पहले फोन या ऐप में daily screen-time limit सेट करना उपयोगी हो सकता है।
इसके अलावा गैर-जरूरी notifications बंद करने से बार-बार फोन देखने की आदत कम की जा सकती है। खाली समय में बिना उद्देश्य स्क्रॉल करने के बजाय कोई निश्चित activity चुनना भी मददगार हो सकता है।
सोने से पहले short videos देखने की आदत पर भी नजर रखना जरूरी है, क्योंकि देर रात तक फोन इस्तेमाल करने से कुल स्क्रीन टाइम बढ़ सकता है।
आगे और रिसर्च की जरूरत
Short-video platforms अभी भी तेजी से बदल रहे हैं और लोगों की डिजिटल आदतें भी लगातार विकसित हो रही हैं। इसलिए यह समझने के लिए लंबे समय तक लोगों का अध्ययन करने वाली longitudinal research की जरूरत है कि short-form video consumption और cognitive control के बीच संबंध किस तरह विकसित होता है। फिलहाल उपलब्ध अध्ययनों से इतना जरूर संकेत मिलता है कि बहुत ज्यादा या problematic short-video use का attention, inhibitory control और self-regulation से संबंध हो सकता है। लेकिन इसे स्थायी brain damage का प्रमाण मानना सही नहीं होगा।इसलिए Instagram Reels और YouTube Shorts को पूरी तरह छोड़ने के बजाय उनके इस्तेमाल की मात्रा और उद्देश्य पर ध्यान देना ज्यादा व्यावहारिक तरीका हो सकता है। डिजिटल कंटेंट मनोरंजन और जानकारी का अच्छा माध्यम है, लेकिन लगातार और बिना मकसद scrolling की आदत को नियंत्रित रखना जरूरी है।
About the Author: Vivek
Vivek is a dedicated journalist and reporter for HBN News 24, committed to bringing you the most accurate and fastest news updates from ground zero.
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