Nepal Flash Flood: Lhende River पर झील टूटने का खतरा

Nepal Lhende River flash flood alert and temporary glacial lake breach threat warning issued by China water resources ministry for downstream areas
Nepal Flash Flood Threat & China Alert: नेपाल में मूसलाधार बारिश और भीषण भूस्खलन के बाद हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। नेपाल और तिब्बत (चीन) के सीमावर्ती पहाड़ी इलाकों में भारी ग्लेशियर टूटने और मलबे के जमाव की वजह से लेंडे नदी (Lhende River) पर एक विशाल अस्थायी झील (Artificial Glacial Lake) बन गई है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय (Ministry of Water Resources) ने नेपाल सरकार को आधिकारिक चेतावनी जारी कर बताया है कि यह प्राकृतिक बांध कभी भी ढह सकता है, जिससे निचले इलाकों में दोबारा सैलाब आने का बड़ा खतरा है।
नेपाल में अचानक क्यों आई यह प्रलयकारी बाढ़?
हिमालयी क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और क्लाइमेट चेंज (Climate Change) के कारण तापमान में हुई वृद्धि से तिब्बत व नेपाल के उच्च पर्वतीय इलाकों में ग्लेशियर अचानक पिघलने लगे। ग्लेशियर के फटने (Glacial Lake Outburst) के साथ पहाड़ों से लाखों टन चट्टानें, मिट्टी और मलबा तेजी से नीचे की ओर बहा।
इस अचानक आए सैलाब और भारी मलबे ने नदियों के स्वाभाविक रास्ते को पूरी तरह रोक दिया। बड़े पैमाने पर हुए लैंडस्लाइड (Landslide) से निकला मलबा लेंडे नदी के ऊपरी हिस्से में इकट्ठा हो गया, जिसने एक अस्थाई रिटेनिंग वॉल (Retaining Wall) की तरह काम किया और नदी के पानी को आगे बढ़ने से रोक दिया।
पहाड़ों में कैसे बनी यह 'मौत की झील' और कितना गहराया जल संकट?
मलबे के इस प्राकृतिक अवरोध की वजह से चोचेन (Chochen) और पुरेपु (Purepu) नदी के संगम स्थल के निकट एक विशाल वाटर बॉडी (Water Body) बन गई, जिसमें लगभग 25 लाख क्यूबिक मीटर (2.5 Million Cubic Meters) पानी एकत्र हो चुका है।
चीन की ओर से की गई सैटेलाइट निगरानी (Satellite Monitoring) में देखा गया है कि झील के पानी का रंग तेजी से मटमैला और गहरा हो रहा है। हाइड्रोलॉजी (Hydrology) के अनुसार, जब रुका हुआ पानी रंग बदलने लगे तो यह इस बात का सीधा संकेत होता है कि मलबे की दीवार पर पानी का दबाव सीमा से अधिक हो चुका है और यह किसी भी क्षण लैप्स या ढह सकती है।
अगर फटा यह प्राकृतिक बांध तो कितनी भीषण होगी तबाही?
चीन के जल विज्ञान विभाग द्वारा तैयार की गई सिमुलेशन रिपोर्ट (Flood Simulation Report) बताती है कि यदि यह अवरोधक दीवार ढहती है, तो नदी में पानी का डिस्चार्ज 500 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड (500 m³/s) की भयानक गति तक पहुँच सकता है।
यद्यपि विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्य जलधारा नदी के तय पाट के भीतर ही बहने की संभावना है, लेकिन वाटर फ्लो की गति इतनी तीव्र होगी कि किनारे बने ढांचों, पुलों और निचले रिहाइशी इलाकों को भारी नुकसान पहुँच सकता है। इसी वजह से चीनी और नेपाली सुरक्षा एजेंसियां सैटेलाइट और ड्रोन्स की मदद से पल-पल की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
नेपाल में अब तक कितना नुकसान हुआ और भारत में क्यों बढ़ा अलर्ट?
नेपाल हाल ही में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की त्रासदी से अभी उबर नहीं पाया है। इस आपदा में अब तक 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सीमा पार तिब्बत क्षेत्र में भी कई मौतें दर्ज हुई हैं। हाल के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि लेंडे नदी में उपजे इस नए जल संकट ने वहां के प्रशासन की परेशानी बढ़ा दी है।
नेपाल सरकार ने लेंडे और त्रिशूली (Trishuli River) नदियों के किनारे बसे गांवों को खाली कराने के निर्देश जारी कर दिए हैं। वहीं दूसरी ओर, नेपाल से आने वाले पानी के संभावित असर को देखते हुए भारत के तराई क्षेत्रों विशेषकर बिहार के सीमावर्ती जिलों में जल संसाधन विभाग को हाई अलर्ट (High Alert) पर रखा गया है।
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About the Author: Ushnish Sharma
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