राम मंदिर दान मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, SIT में फोरेंसिक ऑडिटर शामिल करने का आदेश

SC Seeks Forensic Audit in Ram Temple Case
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के दान के कथित गबन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा है कि जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) में एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाए, ताकि वित्तीय लेन-देन और दान से जुड़े रिकॉर्ड की विशेषज्ञता के साथ जांच की जा सके। साथ ही कोर्ट ने SIT से मामले की स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है।
फोरेंसिक ऑडिट पर कोर्ट का जोर
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले में "गुणवत्तापूर्ण और त्वरित जांच" सुनिश्चित करना आवश्यक है। अदालत का मानना है कि फोरेंसिक ऑडिटर के शामिल होने से वित्तीय दस्तावेजों और दान के रिकॉर्ड की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच संभव होगी। इसी उद्देश्य से यूपी सरकार को SIT का विस्तार करने का निर्देश दिया गया।
दो सप्ताह में मांगी स्टेटस रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने SIT को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर जांच की प्रगति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट अदालत में पेश करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी प्रकार की राजनीतिक टिप्पणी करना नहीं, बल्कि निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करना है।
यूपी सरकार ने क्या बताया?
उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि मामले की जांच के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में एक चार सदस्यीय SIT गठित की गई है। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इसमें एक फोरेंसिक ऑडिटर को पांचवें सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।
पारदर्शिता पर रहेगा फोकस
यह मामला राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। आरोपों की सत्यता की जांच अभी जारी है और अदालत ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों के आधार पर आगे बढ़नी चाहिए।
About the Author: Ushnish Sharma
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