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GSLV-F17 Launch: ISRO के Naughty Boy की बड़ी कामयाबी

ISRO GSLV-F17 ने EOS-05 satellite को सफलतापूर्वक लॉन्च कर भारत की space और Earth observation क्षमता बढ़ाई

ISRO GSLV-F17 ने EOS-05 satellite को सफलतापूर्वक लॉन्च कर भारत की space और Earth observation क्षमता बढ़ाई

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Ushnish Sharmaनई दिल्ली, 4 सितंबर 2026, (अपडेटेड 04:58 am)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO ने एक बार फिर अपनी तकनीकी क्षमता का दम दिखाया है। 4 सितंबर 2026 की सुबह श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 rocket का सफल प्रक्षेपण किया गया। इस मिशन में EOS-05 Earth Observation Satellite को अंतरिक्ष की ओर भेजा गया। लंबे समय से चुनौतीपूर्ण माने जा रहे GSLV Mk II की इस सफलता ने भारतीय space programme में नई उम्मीद और आत्मविश्वास पैदा किया है।

GSLV-F17 Launch में ISRO को क्या बड़ी सफलता मिली


GSLV-F17 ने सुबह करीब 2:55 बजे उड़ान भरी और लगभग 19 मिनट बाद mission की सफलता की पुष्टि हुई। इस दौरान EOS-05 को निर्धारित trajectory की ओर सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया गया। यह उपलब्धि इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले ISRO को अपने कुछ प्रमुख launch missions में असफलताओं का सामना करना पड़ा था।

‘Naughty Boy Rocket’ नाम से GSLV Mk II क्यों जाना जाता है


GSLV Mk II को ISRO में अनौपचारिक रूप से ‘Naughty Boy’ कहा जाता रहा है। इसकी वजह इसका चुनौतीपूर्ण operational record है। NDTV के मुताबिक 19 launches में इस rocket को छह failures का सामना करना पड़ा है। इसके बावजूद यही launch vehicle भारत के लिए महत्वपूर्ण technology और self-reliance का प्रतीक बन चुका है।

GSLV-F17 की सफलता ISRO के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों है


इस मिशन की कामयाबी ऐसे समय आई है जब PSLV को लगातार दो failures के बाद जांच और सुधार की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। ऐसे माहौल में GSLV-F17 का सफल प्रदर्शन ISRO की launch capability के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इससे agency को आगे के missions के लिए operational confidence मिलने की उम्मीद है।


EOS-05 एक advanced Earth Observation Satellite है। यह Geosynchronous Orbit से imaging capability प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। Satellite visible, infrared, multispectral और hyperspectral bands में पृथ्वी की तस्वीरें और data उपलब्ध कराने में सक्षम होगा। इससे Earth monitoring, environmental assessment और strategic applications में मदद मिल सकती है।

Cryogenic Technology ने भारत की Space Journey को कैसे बदला

भारत की space technology journey में cryogenic engine development का बड़ा योगदान रहा है। भारी satellites को अधिक ऊंचाई वाली orbit में भेजने के लिए इस technology की जरूरत थी। विदेशी technology restrictions के बाद ISRO ने अपने दम पर cryogenic propulsion को विकसित करने की लंबी प्रक्रिया शुरू की। वर्षों की research, testing और failures के बाद भारत ने इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की।

GSLV-F17 Mission के बाद ISRO के सामने अगली चुनौती क्या है?

GSLV-F17 की सफलता के बाद भी ISRO के लिए आगे का schedule काफी व्यस्त है। संगठन को आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण launches पूरे करने हैं। इनमें Gaganyaan human spaceflight programme भी प्रमुख है। ऐसे में इस mission की सफलता सिर्फ एक satellite launch तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के ambitious space missions के लिए भी confidence बढ़ाने वाली उपलब्धि है।


GSLV-F17 Success भारत के Space Programme के लिए क्या संदेश देता है

GSLV-F17 की कामयाबी बताती है कि असफलताओं के बाद भी ISRO अपनी technology को सुधारकर आगे बढ़ने की क्षमता रखता है। ‘Naughty Boy’ कहे जाने वाले GSLV Mk II का सफल प्रदर्शन भारत की scientific capability, technological self-reliance और space ambitions के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। EOS-05 के सफल deployment के साथ भारत की Earth observation क्षमता को भी एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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Ushnish Sharma

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