अडानी समूह के चेयरमैन Gautam Adani ने आने वाले दशक के लिए कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति का खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि समूह अपने विज़न को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए तीन प्रमुख कदम उठा रहा है। इनमें गैर-प्रमुख (Non-Core) गतिविधियों को आउटसोर्स करना या उन्हें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) में स्थानांतरित करना शामिल है, जिससे संचालन अधिक कुशल और लागत प्रभावी बन सके।
अडानी समूह डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी तेजी से निवेश कर रहा है। कंपनी 3 गीगावॉट (GW) क्षमता वाला डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है, जो भारत की बढ़ती डिजिटल मांग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं को समर्थन देगा। यह निवेश देश में डेटा स्टोरेज, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र में भी समूह की महत्वाकांक्षी योजनाएं सामने आई हैं। अडानी समूह 10 GW न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। यह पहल भारत की स्वच्छ ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
गौतम अडानी के अनुसार, तकनीक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वच्छ ऊर्जा पर केंद्रित यह रणनीति समूह को अगले दशक में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा सेंटर और न्यूक्लियर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश से भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा सेक्टर को भी मजबूत समर्थन मिलेगा। अडानी समूह की यह नई योजना कंपनी के दीर्घकालिक विकास और भारत की आर्थिक प्रगति दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।