लड़के से लड़की बनना चाहता था, मना करने पर कर दी मां की हत्या

लखनऊ में जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी के विवाद में १७ वर्षीय किशोर द्वारा मां की हत्या के बाद जांच करती पुलिस और फोरेंसिक टीम।
उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में एक ऐसा खौफनाक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने आधुनिक समाज, पारिवारिक रिश्तों की डोर और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चुनौतियों को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी के पॉश इलाके Rajendra Nagar के पास स्थित विजन अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 202 में एक 17 वर्षीय किशोर ने अपनी ही 42 वर्षीय मां गीता भागचंदानी की लोहे की रिंच से ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर दी। यह वारदात न केवल पारिवारिक असहमति और वैचारिक मतभेदों की पराकाष्ठा को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे मानसिक तनाव और संवादहीनता किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
घटना की पृष्ठभूमि और पारिवारिक तनाव
पुलिस और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी किशोर पिछले कई वर्षों से मानसिक उलझनों और पहचान के संकट (Identity Crisis) से जूझ रहा था। परिवार के करीबी लोगों और पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि वह लड़का पिछले करीब 5 से 6 वर्षों से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रसित था। उसका इलाज लखनऊ के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों और नूर मंजिल जैसी जगहों से भी कराया गया था। परिवार के पास बाल कल्याण समिति से जुड़ा एक पत्र भी मौजूद था, जिसमें उसकी मानसिक स्थिति और चिकित्सा संबंधी दिशा-निर्देश दर्ज थे।
परिजनों के अनुसार, जब वह 10-12 साल का था तब तक उसका व्यवहार पूरी तरह सामान्य था, लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा हुआ, उसके व्यवहार, पसंद और प्राथमिकताओं में उल्लेखनीय बदलाव आने लगे। वह खुद को एक लड़की के रूप में प्रस्तुत करने लगा था और उसे महिलाओं की तरह सजने-संवरने तथा कपड़े पहनने का शौक हो गया था। पुलिस के मुताबिक, वह किसी के द्वारा छुए जाने पर भी अत्यधिक गुस्सा हो जाता था।
जेंडर डिस्फोरिया और सर्जरी का विवाद
इस पूरे विवाद की जड़ किशोर की जेंडर पहचान और उसकी इच्छा से जुड़ी थी। वह कथित तौर पर Gender-Affirming Surgery (जेंडर-अफरमिंग सर्जरी) कराना चाहता था और पूरी तरह से लड़की बनना चाहता था। हालांकि, उसका परिवार इस बात के सख्त खिलाफ था। परिजनों का मानना था कि इतनी कम उम्र में और बिना पूरी परिपक्वता के ऐसा कदम उठाना उसके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
परिवार के सदस्यों ने उसे कई बार समझाने की कोशिश की और उसे लगातार मेडिकल तथा मनोवैज्ञानिक सलाह लेने की सलाह दी। इस मुद्दे को लेकर घर में पिछले एक लंबे समय से तनाव और कलह का माहौल बना हुआ था। लगातार बढ़ते विवाद और उसकी मानसिक स्थिति के कारण परिवार ने करीब चार महीने पहले एक बड़ा फैसला लिया था। उसे घर से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर गणेशगंज इलाके में एक अलग कमरा या फ्लैट किराए पर लेकर अलग रखा जाने लगा था। उसकी पढ़ाई, कमरे का किराया और दैनिक जीवन का सारा खर्च उसके पिता राकेश द्वारा उठाया जा रहा था, और हर महीने नियमित रूप से पैसे भेजे जाते थे। इसके बावजूद, मां और बेटे के बीच का वैचारिक अंतराल और तनाव कम नहीं हुआ था।
वारदात की खौफनाक रात और घटनाक्रम
घटना 1 अक्टूबर की रात करीब 9 बजे की है। पुलिस द्वारा जुटाई गई टाइमलाइन के मुताबिक, किशोर उस दिन अपनी मां से मिलने के लिए उनके घर पहुंचा था। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि गीता भागचंदानी एक बार फिर उसे समझाने का प्रयास कर रही थीं और उसे मेडिकल व मनोवैज्ञानिक मदद लेने के लिए प्रेरित कर रही थीं।
इसी बातचीत के दौरान दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। पुलिस के अनुसार, जब गीता भागचंदानी रसोई की तरफ जाने लगीं, तो आरोपी ने कथित तौर पर पीछे से उन पर लोहे की रिंच से अचानक हमला कर दिया। उसने महिला के सिर पर ताबड़तोड़ कई गंभीर वार किए, जिससे वह लहूलुहान होकर फर्श पर गिर गईं। सिर पर गहरी चोट लगने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस की जांच और चौंकाने वाले डिजिटल सबूत
वारदात को अंजाम देने के बाद किशोर ने मौके से भागने या सबूत मिटाने की कोई कोशिश नहीं की। उसने पहले अपने पिता को फोन कर घटना की जानकारी दी और इसके बाद तुरंत Dial 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। उसने पुलिस से कहा कि उसने अपनी मां को मार दिया है और तुरंत फोर्स भेजी जाए। नाका हिंडोला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मृत महिला के शव को कब्जे में लेते हुए नाबालिग आरोपी को बिना किसी विरोध के हिरासत में ले लिया।
डीसीपी पश्चिम जितेंद्र श्रीवास्तव समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और Forensic Team ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के मोबाइल फोन और निजी डायरी से कई ऐसे सुराग मिले हैं, जो यह दर्शाते हैं कि यह हत्या अचानक आवेश में आकर नहीं, बल्कि पूरी योजना के तहत की गई थी:
ऑनलाइन शॉपिंग और हथियार: पुलिस के अनुसार, किशोर ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए एक मास्टर रिंच और पेपर स्प्रे मंगाया था।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल: शुरुआती पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि उसने हत्या की साजिश और उसकी रूपरेखा तैयार करने के लिए Artificial Intelligence की मदद ली थी और इसे अपनी डायरी में विस्तार से लिखा था।
साफ-सफाई की योजना: डायरी में वारदात के बाद खून और अन्य साक्ष्यों को साफ करने के तरीकों का भी जिक्र था, जिसमें गर्म पानी के इस्तेमाल जैसी बातें लिखी हुई मिली हैं।
पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई रिंच, खून से सने कपड़े, मोबाइल फोन और डायरी को अपने कब्जे में ले लिया है और इन्हें फोरेंसिक जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया है।
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जेंडर डिस्फोरिया और विशेषज्ञों की राय
नाका हिंडोला थाना प्रभारी विवेक कुमार चौधरी के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर यह मामला Gender Dysphoria (जेंडर डिस्फोरिया) से जुड़ा प्रतीत होता है, जहां व्यक्ति अपनी जैविक पहचान और मानसिक पहचान के बीच तालमेल न बैठने के कारण गंभीर मानसिक तनाव से गुजरता है। हालांकि, पुलिस इस मामले में किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मनोवैज्ञानिकों और मेडिकल प्रोफेशनल्स की मदद ले रही है। किशोर की मानसिक स्थिति का गहनता से आकलन किया जा रहा है ताकि उसकी मनोदशा और इस अपराध के पीछे के असली मनोवैज्ञानिक कारणों को पूरी तरह समझा जा सके।
About the Author: Vivek
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