ऑपरेशन टाइगर के बीच आदित्य ठाकरे का बागी सांसदों पर हमला, शिवसेना (UBT) में नई टूट

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) यानी शिवसेना (UBT) के भीतर बढ़ते असंतोष और संभावित दल-बदल की खबरों के बीच पार्टी नेता आदित्य ठाकरे ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं ने राजनीतिक लाभ और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के लिए अपनी निष्ठा, विचारधारा और जनता के विश्वास को बेच दिया है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। रिपोर्टों के अनुसार, शिवसेना (UBT) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले दल के लिए पिछले चार वर्षों में सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।

आदित्य ठाकरे ने कहा कि पार्टी और उसकी विचारधारा से विश्वासघात करने वाले नेताओं को जनता कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना (UBT) अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों की ताकत के दम पर इस चुनौती का सामना करेगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दबाव और सत्ता का लालच कई नेताओं को अपनी राह बदलने के लिए मजबूर कर रहा है।

शिवसेना में विभाजन की शुरुआत 2022 में हुई थी, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायकों ने बगावत कर पार्टी से अलग रास्ता अपना लिया था। इसके बाद पार्टी का चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक नियंत्रण भी विवाद का विषय बना रहा। अब लोकसभा सांसदों के संभावित पलायन की खबरों ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र में बदलते राजनीतिक समीकरण आगामी चुनावों पर बड़ा असर डाल सकते हैं। यदि सांसदों का यह समूह वास्तव में शिंदे गुट में शामिल होता है, तो इससे राज्य में विपक्षी राजनीति की दिशा बदल सकती है। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के लिए यह अपने संगठन को एकजुट रखने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी।

फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में शिवसेना (UBT) के भीतर चल रहा संकट किस दिशा में जाता है और महाराष्ट्र की राजनीति में इसका क्या प्रभाव पड़ता है।