बेंगलुरु में NEET परीक्षा से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें एक अभ्यर्थी के परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंचने को लेकर सोशल मीडिया पर कई दावे किए गए थे। कुछ लोगों ने कहा कि यह देरी कांग्रेस की रैली के कारण ट्रैफिक जाम से हुई, लेकिन पुलिस ने इस दावे का तथ्य-जांच कर खंडन किया है।
पुलिस के अनुसार CCTV फुटेज, अभ्यर्थी और परिजनों से बातचीत तथा रूट विश्लेषण से स्पष्ट हुआ कि देरी का कारण कोई सार्वजनिक रैली या ट्रैफिक जाम नहीं था। छात्र ने परीक्षा केंद्र के लिए निर्धारित समय से मात्र 33 मिनट पहले घर से प्रस्थान किया था और लंबा रास्ता चुना, जिससे उसे समय पर पहुंचने में देरी हुई।
इस घटना के बाद परीक्षा केंद्र के बाहर कई छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी देखने को मिली। कुछ छात्रों का दावा था कि ट्रैफिक जाम के कारण वे समय पर नहीं पहुंच पाए, लेकिन पुलिस ने कहा कि उस दिन शहर में किसी भी बड़ी रैली या असामान्य ट्रैफिक की स्थिति नहीं थी। NEET परीक्षा के दौरान देशभर में 22 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए, और कड़ी सुरक्षा व समय सीमा के साथ परीक्षा आयोजित की गई। बेंगलुरु में हुए इस मामले ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस भी छेड़ दी, लेकिन आधिकारिक जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि देरी व्यक्तिगत लापरवाही का परिणाम थी, न कि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम का असर।
इस मामले ने एक बार फिर यह दिखाया है कि महत्वपूर्ण परीक्षाओं में समय प्रबंधन कितना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों को परीक्षा केंद्र के लिए समय से काफी पहले निकलना चाहिए और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए। किसी भी तरह की अफवाह या राजनीतिक दावे को बिना पुष्टि के साझा नहीं करना चाहिए। इस घटना से छात्रों और अभिभावकों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की जानकारी को लेकर अधिक सतर्क रहने की सीख मिलती है।
पुलिस ने सभी छात्रों से अपील की है कि वे समय प्रबंधन का पालन करें और अफवाहों से बचें। यह घटना डिजिटल युग में फैक्ट चेकिंग की अहमियत को भी दर्शाती है। सतर्क रहें। अब।