भारत के रक्षा क्षेत्र और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को बड़ी मजबूती देते हुए रक्षा मंत्रालय (MoD) ने पुणे स्थित भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ 425 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस अनुबंध के तहत कंपनी भारतीय नौसेना के लिए 12 अत्याधुनिक मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर (GTG) सेट का निर्माण और आपूर्ति करेगी। यह पहली बार होगा जब किसी भारतीय कंपनी को नौसेना के युद्धपोतों के लिए गैस टर्बाइन आधारित पावर प्लांट विकसित करने की जिम्मेदारी मिली है।
नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए। यह सौदा देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। परियोजना के तहत विकसित किए जाने वाले 1.25 मेगावाट क्षमता वाले मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर युद्धपोतों पर स्थापित किए जाएंगे और विभिन्न महत्वपूर्ण प्रणालियों को बिजली उपलब्ध कराएंगे।
इन जनरेटरों का उपयोग आधुनिक हथियार प्रणालियों, उन्नत सेंसर, रडार, संचार उपकरणों और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम को संचालित करने के लिए किया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी तकनीक से तैयार होने वाले ये सिस्टम नौसेना की परिचालन क्षमता और युद्धक तैयारी को और मजबूत बनाएंगे।
यह अनुबंध न केवल भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण को गति देगा, बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, तकनीकी विशेषज्ञता विकसित होगी और विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी।
सरकार लगातार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी कंपनियों को प्रोत्साहित कर रही है। भारत फोर्ज को मिला यह अनुबंध उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत देश में उन्नत रक्षा उपकरणों और प्रणालियों का निर्माण किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपलब्धि भविष्य में भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक बाजार में भी मजबूत पहचान दिला सकती है।