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अहीर समाज को कमजोर समझने की भूल न करें, स्वाभिमान से समझौता नहीं होगा : राव नरेंद्र सिंह

​हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह

​हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह

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Manuj Bhanvraमहेंद्रगढ़, 5 नवंबर 2026, (अपडेटेड 04:14 pm)

हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने प्रोफेसर संगीत रागी द्वारा टीवी डिबेट के दौरान अहीर समाज के प्रति की गई अपमानजनक टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पूरे समाज को 'गंवार' कहना केवल शब्दों की अभद्रता नहीं, बल्कि उस जातिवादी और भेदभावपूर्ण सोच का प्रदर्शन है, जो आज भी समाज में बराबरी और सम्मान के अधिकार को स्वीकार नहीं कर पाई है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि संगीत रागी को अहीर समाज के इतिहास पर टिप्पणी करने से पहले रेजांग ला की धरती पर शहीद हुए उन वीर अहीर जवानों का इतिहास पढ़ना चाहिए, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। अहीर समाज का इतिहास किसी की कृपा से नहीं, बल्कि अपने शौर्य, पराक्रम, त्याग और बलिदान से लिखा गया है। जिस समाज के वीरों ने देश की रक्षा के लिए सीने पर गोलियां खाईं, उस समाज को गंवार कहने की हिमाकत बेहद शर्मनाक है।
उन्होंने कहा कि माफी मांग लेने से जातिगत अपमान की मानसिकता समाप्त नहीं हो जाती। सवाल यह है कि आखिर सार्वजनिक मंचों पर किसी पूरे समाज को नीचा दिखाने का दुस्साहस आता कहां से है? ऐसे मामलों में केवल औपचारिक माफी नहीं, बल्कि जवाबदेही तय होनी चाहिए। संबंधित संस्थानों को इस मामले का संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
राव नरेंद्र सिंह ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि अहीर समाज पिछड़ा है, इसलिए उसका अपमान करना आसान समझ लिया गया है? क्या हमारी सामाजिक और आर्थिक स्थिति का मतलब यह है कि हम आज भी अपमान, भेदभाव और शोषण सहते रहें? क्या पिछड़े समाजों का स्वाभिमान कोई मायने नहीं रखता? अब यह सब नहीं चलेगा। संविधान ने हर नागरिक को समानता और सम्मान का अधिकार दिया है। किसी को भी जाति के आधार पर किसी समाज को छोटा दिखाने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, टीवी डिबेट में तीखी बहस भी हो सकती है, लेकिन अपनी व्यक्तिगत बहस में पूरे समाज को घसीटना और करोड़ों लोगों का अपमान करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। विद्वता का परिचय दूसरों को नीचा दिखाने से नहीं, बल्कि अपनी भाषा, विचार और व्यवहार से दिया जाता है।
अहीर समाज ने देश को वीर दिए हैं, बलिदानी दिए हैं और राष्ट्र की रक्षा में अपना गौरवशाली योगदान दिया है। समाज को किसी के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। अब समय आ गया है कि जातिगत अहंकार और भेदभाव की सोच रखने वालों को स्पष्ट संदेश दिया जाए - अहीर समाज का सम्मान कोई खिलौना नहीं है, जिसके साथ कोई भी खिलवाड़ कर सके। अपमान के खिलाफ आवाज उठेगी, जवाबदेही तय होगी और सामाजिक न्याय की लड़ाई मजबूती से जारी रहेगी।
धार्मिक आस्था और मर्यादा के मुद्दे पर धीरेंद्र शास्त्री को घेरा
राव नरेंद्र सिंह ने धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणियों पर भी कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि धर्म के ठेकेदार बनने वालों को पहले अपने शब्दों की मर्यादा और धार्मिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप और लीलाओं पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों तथा भगवान श्रीराम को लेकर 'राम जी के पांच बाप थे' जैसी टिप्पणी से करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। आखिर करोड़ों लोगों के आराध्यों के बारे में इस तरह की भाषा इस्तेमाल करने का अधिकार इन्हें किसने दिया है?
उन्होंने कहा कि धार्मिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। धर्म और आस्था के नाम पर सार्वजनिक रूप से ऐसी टिप्पणियां करने से बचना चाहिए, जिनसे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हों और सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो। धार्मिक उपदेश देने वालों पर भी मर्यादा और जिम्मेदारी का उतना ही दायित्व है जितना समाज के अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों पर। ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए, जो धार्मिक मंचों का इस्तेमाल आस्था और श्रद्धा को ठेस पहुंचाने के लिए करते हैं। भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक हैं। उनका अपमान किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। धर्म के नाम पर दोहरा चरित्र और अपमानजनक बयानबाजी अब बर्दाश्त नहीं होगी।

Manuj Bhanvra

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