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Ram Rahim को 21 दिन की फरलो पर अकाल तख्त और SGPC नाराज

Gurmeet Ram Rahim Singh gets 21-day furlough from Haryana jail as Akal Takht and SGPC criticise repeated releases and raise questions

Gurmeet Ram Rahim Singh gets 21-day furlough from Haryana jail as Akal Takht and SGPC criticise repeated releases and raise questions

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Ushnish Sharma पंजाब, 25 अगस्त 2026, (अपडेटेड 12:49 pm)

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को हरियाणा की सुनारिया जेल से 21 दिन की फरलो मिलने पर विवाद खड़ा हो गया है। मंगलवार को जेल से बाहर आए राम रहीम को इस फैसले पर अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया दी गई।

अकाल तख्त के जत्थेदार ने कहा कि दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध में सजा काट रहे राम रहीम को बार-बार जेल से बाहर आने की अनुमति दी जा रही है, जबकि लंबे समय से जेल में बंद बंदी सिंहों को उनकी सजा पूरी होने के बावजूद रिहाई नहीं मिल रही। उन्होंने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे असमानता का उदाहरण बताया।

इस साल तीसरी बार जेल से बाहर आया राम रहीम

रिपोर्ट के मुताबिक राम रहीम को इस साल जनवरी में 40 दिन और मई में 30 दिन की पैरोल मिली थी। अब उसे 21 दिन की फरलो दी गई है। अगस्त 2017 में दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह 20 साल की सजा काट रहा है। मंगलवार की रिहाई उसकी सजा के बाद जेल से बाहर आने का 17वां मौका बताया गया है।

बंदी सिंहों को लेकर अकाल तख्त का सवाल

जत्थेदार गर्गज्ज ने कहा कि कई बंदी सिंह 30 साल से अधिक समय से जेल में हैं और अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, लेकिन उन्हें रिहाई या पैरोल नहीं मिल रही। उन्होंने जगतार सिंह हवारा का भी जिक्र किया और कहा कि उन्हें अपनी बीमार मां से मिलने के लिए अब तक पैरोल नहीं दी गई है।

SGPC ने भी फैसले को बताया दुर्भाग्यपूर्ण

SGPC कार्यकारिणी सदस्य गुरप्रीत सिंह झब्बर ने राम रहीम को फरलो दिए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में कानून के दो अलग-अलग मापदंड दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ बंदी सिंहों की रिहाई की मांग लंबे समय से जारी है, जबकि राम रहीम को बार-बार पैरोल या फरलो मिल रही है।

राम रहीम की रिहाई के बाद यह मुद्दा एक बार फिर पंजाब की सियासत और धार्मिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। अब अकाल तख्त और SGPC की प्रतिक्रिया के बाद सरकार की पैरोल-फरलो नीति को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।

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