HBN News 24 Logo

Elon Musk के समर्थन में विपक्षी दल, राहुल ने किया Elon का स्वागत, और बोले…

Elon Musk and Rahul Gandhi talking about Starlink satellite internet license delay in India and telecom monopoly controversy.

Elon Musk and Rahul Gandhi talking about Starlink satellite internet license delay in India and telecom monopoly controversy.

Author
Vivekनई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026, (अपडेटेड 05:26 am)

दुनिया के सबसे अमीर शख्स और अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क की कंपनी 'स्टारलिंक' (Starlink) को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की अनुमति मिलने में हो रही देरी को लेकर राजनीतिक गलियारों में घमासान छिड़ गया है। इस मामले में विपक्षी दलों ने खुलकर एलन मस्क का समर्थन किया है, जिससे देश में उद्योग घरानों और राजनीतिक पहुंच को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है।

क्यों भड़के हैं एलन मस्क और क्या है पूरा मामला?

स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए तीखे सवाल उठाए हैं। मस्क का कहना है कि उनकी कंपनी स्टारलिंक दुनिया के 165 से अधिक देशों में कानूनी रूप से काम कर रही है और पिछले पांच सालों से भारत के सभी नियमों और कानूनों का पूरी तरह से पालन कर रही है। इसके बावजूद उन्हें भारत में कमर्शियल लाइसेंस और स्पेक्ट्रम आवंटन क्यों नहीं मिल रहा है?

मस्क ने आरोप लगाया कि भारत में कुछ चुनिंदा प्रभावशाली उद्योगपति (ओलिगार्क) टेलीकॉम सेक्टर पर अपना एकाधिकार (Monopoly) बनाए रखने के लिए उनकी एंट्री में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने इसे भारतीय जनता के अधिकारों के खिलाफ एक बड़ा अपराध करार दिया। हालांकि, दूसरी ओर भारत सरकार और दूरसंचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और स्टारलिंक समेत सभी कंपनियों के मामले अभी सुरक्षा जांच (Security Clearance) के स्तर पर हैं।

Elon Musk Tweet.jpg
Elon Musk Tweet.jpg
Elon को विपक्षी नेताओं का समर्थन

इस पूरे घटनाक्रम के बीच शिवसेना (UBT) की नेता और पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एलन मस्क का समर्थन करते हुए सरकार और उद्योग जगत पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर डेटा साझा करते हुए बताया कि कैसे शुरुआती ऑथराइजेशन मिलने के बावजूद स्टारलिंक, जियो सैटेलाइट और वनवेब जैसी कंपनियों को फाइनल कमर्शियल मंजूरी के लिए लटकाया जा रहा है। उन्होंने 'ओलिगार्की' (कुलीनतंत्र/अल्पतंत्र) का हवाला देते हुए बड़े उद्योगपतियों और सत्ता के गठजोड़ पर कड़े सवाल खड़े किए।

राहुल गांधी की एंट्री: “दोषी कौन और सिस्टम क्या है”

इस विवाद में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी एलन मस्क की पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

राहुल गांधी ने एलन मस्क के एक तीखे सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा— "वेलकम टू इंडिया, एलन। वेट टिल यू डिस्कवर द अदर गाय" (Welcome to India, Elon. Wait till you discover the other guy.) यानी भारत में स्वागत है, एलन, जरा रुकिए और उस 'दूसरे शख्स' या व्यवस्था के बारे में भी जानिए।

Rahul Gandhi Tweet on Musk.jpg
Rahul Gandhi Tweet on Musk.jpg
राहुल को मस्क का जवाब

राहुल गांधी के इस तंज पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए एलन मस्क ने लिखा— "थैंक्यू, राहुल। दिस इज इंडीड ट्रबलिंग।" (Thank you, Rahul. This is indeed troubling.) यानी शुक्रिया राहुल, यह वाकई चिंताजनक स्थिति है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का यह बयान सीधे तौर पर देश के चुनिंदा शीर्ष पूंजीपतियों और वर्तमान शासन प्रणाली के बीच कथित नजदीकी पर एक बड़ा कटाक्ष है। विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि देश की नीतियों को कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के मुनाफे के हिसाब से प्रभावित किया जाता है।

मामले से जुड़े मुख्य बिंदु समझिए

  • लाइसेंस में देरी: स्टारलिंक को 5 साल से अनुपालन के बावजूद अंतिम कमर्शियल सिक्योरिटी क्लीयरेंस का इंतजार है।
  • एकाधिकार के आरोप: मस्क ने देश के प्रभावशाली समूहों पर बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए अड़ंगे लगाने का आरोप लगाया है।
  • विपक्षी समर्थन: प्रियंका चतुर्वेदी और राहुल गांधी जैसे विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर सरकार और उद्योग घरानों की मिलीभगत पर सवाल उठाए हैं।
  • सरकार का रुख: दूरसंचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद ही नियमों के तहत सभी कंपनियों को आगे की अनुमति दी जाएगी।
  • ये भी पढ़ें- राहुल-प्रियंका पर एक ओर मुकदमा, ये लगे आरोप ?

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट का भविष्य और चुनौतियां

इस पूरे विवाद के बीच यह समझना भी जरूरी है कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट (GMPCS) का बाजार कितना बड़ा और महत्वपूर्ण है।

  • दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच: भारत के कई ऐसे ग्रामीण, पहाड़ी और दूर-दराज के क्षेत्र हैं जहां आज भी ऑप्टिकल फाइबर केबल या मजबूत मोबाइल टावर बिछाना आर्थिक या भौगोलिक रूप से संभव नहीं हो पाया है। ऐसे इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने के लिए सैटेलाइट आधारित तकनीक ही एकमात्र विकल्प है।
  • पारदर्शिता और सुरक्षा मानक: भारत सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) और डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty) से समझौता नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि अंतरिक्ष से जुड़ी तकनीक और कम्यूनिकेशन लाइसेंस देने से पहले सभी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कड़े मूल्यांकन किए जा रहे हैं।

Vivek

About the Author: Vivek

Vivek is a dedicated journalist and reporter for HBN News 24, committed to bringing you the most accurate and fastest news updates from ground zero.

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!