राहुल-प्रियंका पर एक ओर मुकदमा, ये लगे आरोप ?

Delhi Police files FIR against Rahul Gandhi and Priyanka Gandhi over protest against Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar and SIR issue.
इन दिनों देश में विरोधी पार्टियां मुख्य रूप से कांग्रेस पार्टी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है. कई दिनों से कांग्रेस के दिग्गज नेता दिल्ली में डटे हुए हैं और ज्ञानेश कुमार को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. ऐसे में अब नई दिल्ली में कांग्रेस के प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई कांग्रेस नेताओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की है. पुलिस का आरोप है कि उन्होंने पुलिस के साथ मारपीट, सरकारी काम में बाधा , धक्कामुक्की और बदलसलूकी की है. इसी को लेकर दिल्ली पुलिस ने ये रुख अपनाया है. एक ओर जहां कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदर्शन करना और मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलना उनका अधिकार है तो वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि तमाम नेताओं की ओर से कानून का उल्लंघन किया जा रहा है. दोनों के बीच चल रहा ये विवाद लंबे समय से चल रहा है. इससे पहले भी दिल्ली पुलिस ने आकाशवाणी भवन में धरने में शामिल नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था.
लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से जब उनके खिलाफ FIR को लेकर बात की गई तो उन्होंने कहा कि अभी उनके खिलाफ 45 के करीब मुकदमे दर्ज है और मेरा लक्ष्य है कि 100 FIR दर्ज हो ये मेरे लिए मेडल के सम्मान होगा. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अलग-अलग राज्यों में राहुल गांधी के खिलाफ पुलिस ने कई मुकदमे दर्ज किए हैं. जिसको लेकर राहुल गांधी कानूनी लड़ाई भी लड़ रहे है. ऐसे में अब दिल्ली पुलिस की ओऱ से एक ओर FIR उनकी मुश्किलें भी बढ़ा सकता है.
मंगलवार की घटना, हिरासत में नेता
इंडिया गठबंधन के नेताओं की ओर से मंगलवार को संसद मार्ग से चुनाव आयोग तक मार्च की तैयारी थी. लेकिन पुलिस की ओर से रास्ते रोक दिए गए नेताओं को हिरासत में लिया गया था. इसी दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी भवन में घुस गए और कई घंटों तक धरना दिया. बाद में पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया.
बुधवार की घटना, फिर हिरासत में नेता
क्या है विपक्षी दलों की मांग
- विपक्ष दलों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
- SIR पर पुरी तरह से रोक लगाई जाए
- वोटर सूची से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक किया जाए
बीजेपी नेताओं का कांग्रेस नेता
वहीं कांग्रेस के प्रदर्शन और मांगों को लेकर बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधा. बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस बेबुनियादी मुद्दे उठा रही है और जितने भी आरोप लगाए जा रहे हैं उनमें किसी तरह की सच्चाई नहीं है. बीजेपी की माने तो SIR का फैसला जनता के हित में है और लोकतंत्र के मुताबिक ही SIR किया जा रहा है. जो वोटर्स मान्य नहीं है उन्हें वोटर सूची से निकाला जा रहा है.
इस पूरे घटनाक्रम के बाद देश की राजधानी दिल्ली की सियासत पूरी तरह से गरमा गई है. कांग्रेस पार्टी का साफ तौर पर यह मानना है कि चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता खतरे में है और जनता के मताधिकार की रक्षा के लिए उनका यह सड़क पर उतरना एक नैतिक और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन और संघर्ष विभिन्न माध्यमों से जारी रहेगा. कांग्रेस कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग भी अपने शीर्ष नेतृत्व के समर्थन में सड़कों पर उतर आया है, जिससे कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़पें देखने को मिल रही हैं.
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और प्रशासनिक अधिकारियों का यह कड़ा रुख है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करवाना सर्वोपरि है. पुलिस प्रशासन का तर्क है कि बिना अनुमति के संवेदनशील इलाकों में प्रवेश करना, सार्वजनिक संपत्ति या सरकारी कामकाज में बाधा उत्पन्न करना और सुरक्षाकर्मियों के साथ बल प्रयोग करना किसी भी स्थिति में कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है. यही कारण है कि कानून का उल्लंघन करने वाले सभी प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ विधिक प्रावधानों के तहत सख्त धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की अव्यवस्था से बचा जा सके.
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है. विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर एक बड़ा राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने की कोशिश में है, वहीं सत्ता पक्ष इसे केवल राजनीतिक स्टंट और कानून व्यवस्था को बाधित करने का प्रयास बता रहा है. इन सबके बीच अदालतों में कानूनी लड़ाइयों का दौर भी लंबा चलने के पूरे आसार हैं, जो भारतीय लोकतंत्र की वर्तमान राजनीतिक दिशा को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है.
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