Delhi Protest: CJP व AISA प्रदर्शन से पहले 1000 हिरासत में

Delhi Police personnel barricading roads and detaining protesters during overnight crackdown ahead of CJP and AISA protest against CEC
Delhi Police Crackdown: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन; CJP और AISA कार्यकर्ताओं समेत 1,000 से अधिक लोग रातभर में हिरासत में लिए गए
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) अभियान के खिलाफ प्रस्तावित एक बड़े और व्यापक विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले दिल्ली पुलिस ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। प्रतिष्ठित समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janta Party - CJP) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) द्वारा जंतर-मंतर पर आहूत इस प्रदर्शन को पूरी तरह विफल करने के उद्देश्य से पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न इलाकों में बड़े पैमाने पर छापेमारी की। इस गुप्त और सुनियोजित रातभर चले अभियान के दौरान विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र कार्यकर्ताओं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, युवा नेताओं और आम नागरिकों सहित 1,000 से अधिक लोगों को एहतियातन हिरासत में ले लिया गया है।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले इस भारी-भरकम धरपकड़ और सुरक्षा व्यवस्था को क्यों अंजाम दिया?
मध्य दिल्ली, जंतर-मंतर, संसद मार्ग और निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) के आसपास के संपूर्ण क्षेत्रों में पहले से ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (BNSS Section 163) के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई थी। पुलिस अधिकारियों का तर्क था कि किसी भी प्रकार के अनधिकृत मार्च से राजधानी की कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती थी:
Overnight Preventive Detentions: दिल्ली पुलिस के विशेष दलों ने मध्य दिल्ली, उत्तरी परिसर (North Campus), जामिया नगर, जेएनयू और शहर के अन्य रिहायशी इलाकों में स्थित छात्र हॉस्टलों, किराए के पीजी (PG) आवासों और प्रमुख एक्टिविस्टों के ठिकानों पर आधी रात के बाद अचानक दबिश दी।
Barricading Central Delhi & Key Routes: जंतर-मंतर की ओर आने वाले तमाम रास्तों, कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल तथा चुनाव आयोग की बिल्डिंग के चारों ओर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। साथ ही कई परतों वाली भारी लोहे की बैरिकेडिंग कर दी गई ताकि किसी भी जत्थे को आगे बढ़ने का मौका न मिल सके।
Public Transport and Metro Restrictions: सुरक्षा के अत्यधिक कड़े इंतजामों के तहत केंद्रीय दिल्ली के संवेदनशील मेट्रो स्टेशनों के चुनिंदा गेटों को कुछ घंटों के लिए बंद रखा गया और सार्वजनिक बसों के मार्गों में भी बदलाव किया गया ताकि प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा रोका जा सके।
Delhi protest against CEC
CJP और AISA के कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग के खिलाफ क्यों कर रहे हैं यह विरोध?
छात्र संगठनों, नागरिक अधिकार समूहों और विपक्षी आंदोलनों का यह रोष सीधे तौर पर देश की चुनावी प्रक्रिया, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता और आम नागरिकों के मौलिक मताधिकार से जुड़ा हुआ है:
SIR and Massive Voter Deletion: प्रदर्शनकारियों और आयोजकों का मुख्य आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) अभियान के तहत दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में लाखों गरीब, प्रवासी मजदूरों, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों और हाशिए के समुदायों के नाम बिना किसी पुख्ता पूर्व सूचना के मतदाता सूचियों से सुनियोजित तरीके से हटा दिए गए हैं।
Demand for Accountability and Resignation: आंदोलनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे और पारदर्शी, दोषमुक्त मतदाता सूची प्रणाली बहाल किए जाने की पुरजोर मांग कर रहे हैं।
Suppression of Democratic Voices: छात्र समूहों का कहना है कि वर्तमान समय में सरकार और निर्वाचन आयोग मिलकर चुनावी पारदर्शिता पर उठ रहे गंभीर सवालों का तार्किक उत्तर देने के बजाय पुलिस बल का दुरुपयोग करके जनआवाज को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
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इस व्यापक गिरफ्तारी और पुलिसिया कार्रवाई के बाद छात्र संगठनों, विपक्षी नेताओं और राजनीतिक हलकों की क्या प्रतिक्रिया सामने आई है?
रातभर चले इस ताबड़तोड़ ऑपरेशन और बड़े पैमाने पर हुई हिरासत के बाद दिल्ली की राजनीति में उबाल आ गया है और विभिन्न राजनीतिक दलों ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है:
Protest Stifled Unconstitutionally: AISA, CJP और अन्य सहयोगी नागरिक संगठनों के शीर्ष प्रवक्ताओं ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना और अपनी असहमति जताना प्रत्येक भारतीय नागरिक का बुनियादी संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सरकार डर के माहौल में युवाओं को घरों से उठाकर जेल और थानों में ठूंस रही है।
Detained at Remote Police Stations: पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए सैकड़ों विद्यार्थियों और कार्यकर्ताओं को मध्य दिल्ली के थानों में जगह न होने के कारण शहर से दूर बवाना, नजफगढ़, सुल्तानपुरी और नरेला जैसे दूर-दराज के पुलिस थानों में बसों में भरकर ले जाया गया।
Unbowed Spirit of Resistance: तमाम गिरफ्तारियों और पुलिस की इस दमनकारी नीति के बावजूद युवा नेताओं और छात्र संगठनों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रशासन की इन पाबंदियों से उनका हौसला टूटने वाला नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी है कि मताधिकार की रक्षा और चुनावी निष्पक्षता के इस संघर्ष को आने वाले दिनों में देशव्यापी स्तर पर और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
About the Author: Ushnish Sharma
Ushnish Sharma is a dedicated journalist and reporter for HBN News 24, committed to bringing you the most accurate and fastest news updates from ground zero.
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