बक्सा टाइगर रिजर्व में फिर गूंजेगी बाघों की दहाड़, बंगाल में टाइगर पुनर्वास योजना पर केंद्र सरकार की तैयारी

Buxa Tiger Reserve Set for Tiger Reintroduction as Centre Plans to Boost Bengal’s Big Cat Population
उत्तर बंगाल का बक्सा टाइगर रिजर्व एक बार फिर बाघों की दहाड़ से गूंज सकता है। केंद्र सरकार यहां बाघों के पुनर्वास (Tiger Reintroduction) की योजना पर काम कर रही है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों की सलाह के साथ उपयुक्त क्षेत्रों में बाघों को दोबारा बसाने की प्रक्रिया पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
भूपेंद्र यादव ने कोलकाता में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के 111वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां वर्ष 2008 में बाघों की संख्या शून्य थी, लेकिन सफल पुनर्वास कार्यक्रम के बाद अब यह संख्या बढ़कर 56 हो चुकी है। इसी सफलता को देखते हुए अब पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में भी ऐसी ही पहल की जा रही है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बक्सा टाइगर रिजर्व में टाइगर पुनर्वास कार्यक्रम की शुरुआत 29 जुलाई, यानी अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर की जा सकती है। योजना के तहत पहले चरण में दो बाघ लाए जाएंगे, जिनमें पहला बाघ बिहार के एक टाइगर रिजर्व से लाए जाने की संभावना है। अधिकारियों का मानना है कि बक्सा का प्राकृतिक आवास बाघों के लिए उपयुक्त है और यहां उनकी संख्या बढ़ाने की अच्छी संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सुंदरबन में पहले से ही पर्याप्त संख्या में रॉयल बंगाल टाइगर मौजूद हैं। वहां का मैंग्रोव जंगल अलग प्रकार का पारिस्थितिकी तंत्र है, इसलिए किसी अन्य क्षेत्र के बाघों को वहां बसाना व्यावहारिक नहीं होगा। इसी कारण बक्सा टाइगर रिजर्व को पुनर्वास के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना गया है।
अपने संबोधन में भूपेंद्र यादव ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद भारत की पर्यावरण नीति केवल नियमों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ी है। उन्होंने Mission LiFE, International Solar Alliance, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure (CDRI), International Big Cat Alliance और Global Biofuels Alliance जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से अब तक देश में टाइगर रिजर्व की संख्या 47 से बढ़कर 58 हो चुकी है। वहीं एशियाई शेरों की संख्या भी 2015 के 523 से बढ़कर 2026 में 891 तक पहुंच गई है। सरकार का मानना है कि बक्सा में बाघों की वापसी से न केवल जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म को भी नई गति मिलेगी।
About the Author: Ankit Chauhan
Ankit Chauhan is a dedicated journalist and reporter for HBN News 24, committed to bringing you the most accurate and fastest news updates from ground zero.
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