1947 के बंटवारे की दर्दनाक यादें फिर हुईं ताजा, अमृतसर में ‘चराग-ए-याद’ कार्यक्रम ने सुनाई विस्थापन की कहानी

1947 Partition Memories Revived in Amritsar
भारत के इतिहास का सबसे दर्दनाक अध्याय माने जाने वाले 1947 के विभाजन की यादें अमृतसर में एक खास कार्यक्रम के दौरान फिर जीवंत हो उठीं। अमृतसर के Partition Museum में उर्दू क्लब अमृतसर की ओर से ‘चराग-ए-याद’ नाम से एक भावुक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विभाजन की पीड़ा, विस्थापन, संघर्ष और इंसानी जज्बे को कहानियों, कविता और संगीत के माध्यम से याद किया गया।
16 साल की उम्र में विभाजन के गवाह बने सुदर्शन कपूर
कार्यक्रम में 96 वर्षीय पूर्व अधिवक्ता और अमृतसर सिविल सोसाइटी के सदस्य सुदर्शन कपूर ने 1947 के अपने अनुभव साझा किए। उस समय वह सिर्फ 16 साल के थे और उन्होंने अपनी आंखों के सामने परिवारों को अपना घर छोड़ते और रिश्तों को टूटते देखा था।
कपूर ने बताया कि अमृतसर में हिंदू, सिख और मुस्लिम समुदाय लंबे समय तक आपसी सम्मान और सद्भाव के साथ रहते थे। लेकिन विभाजन के दौरान अचानक पड़ोसी एक-दूसरे से अलग हो गए। कई लोग बिना अलविदा कहे चले गए और कुछ अपने गंतव्य तक भी नहीं पहुंच सके।
विस्थापन और दर्द की कहानियों को किया याद
‘चराग-ए-याद’ कार्यक्रम का आयोजन उर्दू क्लब अमृतसर ने Timeless Amritsar और Partition Museum के सहयोग से किया। कार्यक्रम में वास्तविक घटनाओं और विभाजन से जुड़ी यादों के साथ कविता और साहित्य को भी शामिल किया गया।
सुदर्शन कपूर की गवाही Partition Museum के मौखिक अभिलेखों का हिस्सा भी है। उनकी कहानी ने दर्शकों को उस दौर के मानसिक आघात, परिवारों के बिछड़ने और अचानक हुए विस्थापन की वास्तविक तस्वीर से रूबरू कराया।
मंटो और इस्मत चुगताई की रचनाओं ने भी छुआ दिल
कार्यक्रम में सआदत हसन मंटो, इस्मत चुगताई, कृष्ण चंदर, राजिंदर सिंह बेदी और कुर्रतुल ऐन हैदर जैसे मशहूर लेखकों की रचनाओं के जरिए विभाजन के मानवीय पक्ष को सामने रखा गया।
मंटो की ‘टोबा टेक सिंह’, इस्मत चुगताई की ‘जड़ें’ और कुर्रतुल ऐन हैदर की ‘जिलावतन’ जैसी रचनाओं के माध्यम से विस्थापन, पहचान और अपने घर से बिछड़ने की भावनाओं को प्रस्तुत किया गया।
इतिहास से सीख लेने का संदेश
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल 1947 की घटनाओं को याद करना नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से सीख लेने का संदेश देना भी था। आयोजकों ने कहा कि अतीत की कहानियां यह समझने में मदद करती हैं कि हिंसा, संघर्ष और विस्थापन की कीमत कितनी बड़ी होती है।
‘चराग-ए-याद’ ने साहित्य, संगीत और प्रत्यक्ष अनुभवों के जरिए विभाजन के उस दर्द को सामने रखा, जो दशकों बाद भी उन परिवारों की यादों में जीवित है।
About the Author: Ushnish Sharma
Ushnish Sharma is a dedicated journalist and reporter for HBN News 24, committed to bringing you the most accurate and fastest news updates from ground zero.
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