पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नई जांच अधिकारी से उसी आरोपों पर दोबारा जांच नहीं

Punjab & Haryana HC: New Inquiry Officer Cannot Conduct Fresh Enquiry on Same Charges
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने विभागीय जांच से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि अनुशासनिक प्राधिकारी जांच रिपोर्ट से असंतुष्ट होने पर मामले को आगे की जांच के लिए वापस भेज सकता है, लेकिन पंजाब सिविल सर्विसेज (प्यूनिशमेंट एंड अपील) रूल्स, 1970 के Rule 9 के तहत उसी आरोपों पर नए जांच अधिकारी की नियुक्ति कर fresh या de novo enquiry नहीं कराई जा सकती।
कोर्ट ने Rule 9 के दायरे को स्पष्ट करते हुए कहा कि नियम अनुशासनिक प्राधिकारी को जांच मामले को आगे की जांच के लिए वापस भेजने की अनुमति देता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि पहले से चल चुकी विभागीय जांच को समाप्त कर उसी आरोपों पर एक नए Inquiry Officer के माध्यम से पूरी तरह नई जांच शुरू की जाए।
यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ होने वाली विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोर्ट की टिप्पणी यह स्पष्ट करती है कि जांच प्रक्रिया में नियमों और निर्धारित कानूनी सीमाओं का पालन किया जाना जरूरी है।
फैसले के अनुसार, यदि अनुशासनिक प्राधिकारी Enquiry Report से संतुष्ट नहीं है, तो वह नियमों के तहत आगे की जांच के लिए उचित कदम उठा सकता है। लेकिन केवल असंतोष के आधार पर किसी नए जांच अधिकारी को नियुक्त कर उसी आरोपों की fresh या de novo enquiry शुरू करना Rule 9 के तहत अधिकृत नहीं है।
पंजाब सिविल सर्विसेज (Punishment and Appeal) Rules, 1970 के तहत विभागीय जांच की प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट की यह व्याख्या सरकारी कर्मचारियों और विभागीय अधिकारियों के लिए अहम है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि disciplinary proceedings में जांच दोबारा कराने और नई जांच शुरू करने के बीच कानूनी अंतर है
About the Author: Gia Rana
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