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केतन हत्याकांड से चर्चा में आया लोहागढ़ किला: जानें 2000 साल पुराने इस रहस्यमयी किले का इतिहास और शिवाजी महाराज से कनेक्शन

Lohagarh Fort History: Mystery, Shivaji Connection & Ketan Murder Case Explained

Lohagarh Fort History: Mystery, Shivaji Connection & Ketan Murder Case Explained

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Manuj Bhanvraनई दिल्ली, 26 जून 2026, (अपडेटेड 06:52 am)

Lohagarh Fort History: महाराष्ट्र के लोनावला की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच स्थित लोहागढ़ किला इन दिनों अपनी प्राकृतिक खूबसूरती नहीं, बल्कि चर्चित केतन हत्याकांड की वजह से सुर्खियों में है। जिस ऐतिहासिक किले पर कभी वीर योद्धाओं के कदमों की गूंज सुनाई देती थी, वहीं अब एक सनसनीखेज हत्या की गुत्थी ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह किला कितना पुराना है और इसके इतिहास में ऐसे कौन-से रहस्य छिपे हैं, जो आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं?

इतिहासकारों के अनुसार, लोहागढ़ किले का इतिहास लगभग 2,000 वर्ष पुराना माना जाता है। हालांकि इसके निर्माण की सटीक तिथि उपलब्ध नहीं है, लेकिन माना जाता है कि इस पर समय-समय पर सातवाहन, चालुक्य, राष्ट्रकूट, यादव, मुगल और मराठा शासकों का शासन रहा। यह किला महाराष्ट्र के पुणे जिले में लोनावला के पास सह्याद्रि पर्वतमाला की लगभग 1,033 मीटर ऊंचाई पर स्थित है और अपनी अभेद्य संरचना के कारण "लोहागढ़" यानी लोहे जितना मजबूत किला कहलाता है।

लोहागढ़ किले का सबसे गौरवशाली अध्याय छत्रपति शिवाजी महाराज के शासनकाल से जुड़ा है। वर्ष 1648 में शिवाजी महाराज ने इस किले पर अधिकार किया था। बाद में 1665 की पुरंदर संधि के तहत यह किला मुगलों को सौंपना पड़ा, लेकिन केवल पांच साल बाद 1670 में शिवाजी महाराज ने इसे दोबारा जीत लिया। इतिहास में यह भी उल्लेख मिलता है कि सूरत विजय के बाद प्राप्त खजाने को सुरक्षित रखने के लिए इस किले का उपयोग किया गया था।

इस किले की सबसे अनोखी पहचान है "विंचू काटा", जिसका अर्थ होता है बिच्छू की पूंछ। यह लंबा और संकरा पहाड़ी मार्ग दूर से बिल्कुल बिच्छू की पूंछ जैसा दिखाई देता है। प्राचीन समय में यही हिस्सा दुश्मनों पर नजर रखने और उनकी गतिविधियों को रोकने के लिए सबसे महत्वपूर्ण रक्षा बिंदु माना जाता था। आज भी यहां पहुंचने वाले ट्रैकर्स और पर्यटक इसकी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाते।

हालांकि, हाल ही में सामने आए केतन हत्याकांड ने इस ऐतिहासिक धरोहर की पहचान पर एक दर्दनाक सवाल खड़ा कर दिया है। शुरुआती जांच में हादसा मानी गई घटना बाद में कथित हत्या की साजिश के रूप में सामने आई, जिसके बाद यह किला एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया। फिलहाल मामले की जांच जारी है, लेकिन इस घटना ने सदियों पुराने इस ऐतिहासिक किले को एक नई और रहस्यमयी पहचान दे दी है। 

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