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वैज्ञानिकों ने खोजा पृथ्वी का सबसे प्राचीन उल्कापिंड क्रेटर, ज़िरकॉन क्रिस्टल से सामने आई 3.02 अरब वर्ष पुरानी उम्र

Scientists Confirm Earth’s Oldest Impact Crater Is 3.02 Billion Years Old Using Zircon Crystal Dating

Scientists Confirm Earth’s Oldest Impact Crater Is 3.02 Billion Years Old Using Zircon Crystal Dating

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Ankit Chauhanनई दिल्ली, 26 जून 2026, (अपडेटेड 08:00 am)

वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के सबसे पुराने ज्ञात उल्कापिंड (Impact Crater) की उम्र का सफलतापूर्वक निर्धारण कर लिया है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पिलबारा क्रेटॉन (Pilbara Craton) क्षेत्र स्थित नॉर्थ पोल डोम (North Pole Dome) में मिले ज़िरकॉन (Zircon) क्रिस्टलों के अध्ययन से पता चला है कि यह विशाल प्रभाव क्रेटर लगभग 3.024 अरब वर्ष पहले बना था। यह खोज पृथ्वी के शुरुआती भूवैज्ञानिक इतिहास और जीवन की उत्पत्ति को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

इस शोध का नेतृत्व कर्टिन यूनिवर्सिटी (Curtin University) के वैज्ञानिक क्रिस किर्कलैंड और उनकी टीम ने किया। वैज्ञानिकों ने ज़िरकॉन और एपेटाइट (Apatite) जैसे खनिजों की रेडियोमेट्रिक डेटिंग तकनीक का उपयोग किया। अध्ययन में पाया गया कि उल्कापिंड के टकराने से उत्पन्न अत्यधिक गर्मी और दबाव ने इन खनिजों की संरचना को बदल दिया, जिससे वे एक तरह की "मिनरल क्लॉक" बन गए। इसी प्रक्रिया ने वैज्ञानिकों को प्रभाव की सटीक समय-सीमा निर्धारित करने में मदद की।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह क्रेटर पृथ्वी के आर्कियन युग (Archaean Eon) का एकमात्र प्रमाणित प्रभाव क्रेटर है। यह वह समय था जब पृथ्वी पर शुरुआती महाद्वीप बन रहे थे, वातावरण में ऑक्सीजन लगभग नहीं थी और ज्वालामुखीय गतिविधियां बेहद तीव्र थीं। इसी दौर में सूक्ष्मजीवों के रूप में जीवन की शुरुआती संभावनाएं भी विकसित होनी शुरू हुई थीं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इतने बड़े उल्कापिंड के प्रभाव ने केवल एक विशाल गड्ढा ही नहीं बनाया, बल्कि पृथ्वी की प्रारंभिक सतह, मैग्मा के प्रवाह और महाद्वीपों के निर्माण की प्रक्रिया को भी प्रभावित किया होगा। इसके अलावा, ऐसे प्रभावों से बने गर्म जल स्रोत सूक्ष्मजीवों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर सकते थे, जिससे जीवन की शुरुआत में भी इनकी भूमिका रही हो सकती है।

इस खोज से पहले पृथ्वी का सबसे पुराना ज्ञात प्रभाव क्रेटर लगभग 2.2 अरब वर्ष पुराना माना जाता था। नया अध्ययन पृथ्वी के प्रभाव इतिहास को लगभग 80 करोड़ वर्ष और पीछे ले जाता है तथा शुरुआती पृथ्वी के विकास, भूगर्भीय बदलावों और जीवन की उत्पत्ति से जुड़े कई नए सवालों के जवाब तलाशने का मार्ग खोलता है।

Ankit Chauhan

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