उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए हाई-प्रोफाइल लेम्बोर्गिनी रोड एक्सीडेंट मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। जिस मामले ने रविवार दोपहर शहर में सनसनी फैला दी थी, उसी केस में आरोपी शिवम मिश्रा को अदालत से जमानत मिल गई है। कोर्ट ने उन्हें 20 हजार रुपये के पर्सनल बॉन्ड और 20 हजार रुपये की अंडरटेकिंग पर रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही पुलिस की रिमांड की मांग को भी खारिज कर दिया गया है।
अदालत में क्या हुआ?
कानपुर की अदालत में पेशी के दौरान पुलिस ने शिवम मिश्रा की 14 दिन की रिमांड मांगी थी। लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत ने जब गिरफ्तारी के आधार और पूछताछ की प्रक्रिया पर सवाल उठाए, तो पुलिस संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई। अदालत ने माना कि यह मामला सात साल से कम सजा वाले प्रावधान के अंतर्गत आता है, ऐसे में सीधे गिरफ्तारी और रिमांड की मांग उचित नहीं ठहराई जा सकती।
इसके बाद अदालत ने रिमांड अर्जी खारिज करते हुए शिवम मिश्रा को 20-20 हजार रुपये के निजी मुचलके और अंडरटेकिंग पर जमानत दे दी।
वकील का बड़ा दावा
शिवम मिश्रा के वकील नरेश चंद्र त्रिपाठी ने अदालत के बाहर मीडिया से बातचीत में कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह एक मामूली एक्सीडेंट था, जो कार की तकनीकी खराबी के कारण हुआ। उनके अनुसार, एक व्यक्ति को हल्की चोट आई थी और उसका आपसी समझौता भी हो चुका था।
वकील का दावा है कि सिर्फ इसलिए मामले को तूल दिया गया क्योंकि गाड़ी बेहद महंगी थी और शिवम एक बड़े कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने सरकार और कुछ नेताओं के दबाव में आकर बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए गिरफ्तारी की।
“पुलिस नहीं दे पाई जवाब”
त्रिपाठी ने कहा कि पुलिस ने कोर्ट में यह तर्क दिया कि शिवम जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। लेकिन जब अदालत ने पूछा कि उनसे पूछताछ के लिए कब और कितनी बार नोटिस जारी किए गए, तो पुलिस कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सकी। वकील के मुताबिक, कानून के अनुसार कम से कम तीन बार नोटिस दिया जाना चाहिए था, जो नहीं दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि शिवम को कानपुर से नहीं, बल्कि दिल्ली से गिरफ्तार किया गया और उन्हें झूठे तरीके से पेश किया गया।
स्वास्थ्य को लेकर चिंता
वकील ने यह भी दावा किया कि शिवम मिश्रा की तबीयत ठीक नहीं है। वे ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं और उनकी सेहत को खतरा हो सकता है। ऐसे में गिरफ्तारी और हिरासत की कार्रवाई को उन्होंने अनुचित बताया।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह मामला रविवार दोपहर कानपुर के ग्वालटोली क्षेत्र स्थित वीआईपी रोड का है। आरोप है कि तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी कार चला रहे थे। कार अनियंत्रित होकर पहले एक ऑटो और बुलेट सवार से टकराई, फिर फुटपाथ पर चढ़ गई। इस हादसे में चार लोग घायल हो गए।
घटना के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लेम्बोर्गिनी के पीछे चल रही दूसरी कार से आए सुरक्षाकर्मियों ने चालक को निकालने की कोशिश की, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। बताया जाता है कि भीड़ ने कार का शीशा तोड़कर चालक को बाहर निकाला और बाद में उसे निजी अस्पताल पहुंचाया गया।
आगे क्या?
अब जब अदालत से जमानत मिल चुकी है और रिमांड अर्जी खारिज हो चुकी है, तो मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। क्या यह वाकई एक तकनीकी खराबी से हुआ मामूली हादसा था, या तेज रफ्तार और लापरवाही की कहानी अभी बाकी है?
कानपुर का यह हाई-प्रोफाइल लेम्बोर्गिनी एक्सीडेंट केस फिलहाल कानूनी मोड़ ले चुका है, लेकिन सच्चाई की अंतिम तस्वीर अभी सामने आना बाकी है।