वॉशिंगटन/ताइपे: Donald Trump जब अमेरिका के राष्ट्रपति थे, तब ताइवान के साथ एक जरूरी डील हुई थी। इस डील के हिसाब से ताइवान अमेरिका से आने वाले कई सामानों पर लगने वाला टैक्स कम करेगा। इससे दोनों देशों के बिजनेस में और दोस्ती बढ़ेगी।
डील में क्या-क्या है?
* ताइवान, अमेरिका से आने वाले खेती और कारखानों में बने सामान पर टैक्स कम करेगा।
* अमेरिका की कंपनियों को ताइवान में बिजनेस करने के ज्यादा मौके मिलेंगे।
* टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के मामले में मिलकर काम करने पर जोर दिया जाएगा।
* बिजनेस में आने वाली रुकावटों को हटाकर नई कंपनियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
जानकारों का कहना है कि इस डील से अमेरिका के किसानों और कंपनियों को फायदा होगा। साथ ही, ताइवान को भी अमेरिका में अपना सामान बेचने के अच्छे मौके मिलेंगे।
डील का मतलब
अमेरिका और ताइवान के बीच ये डील सिर्फ बिजनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक खास मतलब भी है। एशिया में जो माहौल चल रहा है, उसे देखते हुए ये कदम अमेरिका और ताइवान की दोस्ती को और मजबूत करने का इशारा है।
ताइवान पहले से ही अमेरिका का अच्छा बिजनेस पार्टनर है, खासकर सेमीकंडक्टर के मामले में। इस नई डील से टेक्नोलॉजी में दोस्ती और सामान की सप्लाई को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पैसे का फायदा
पैसे के हिसाब से सोचने वाले लोगों का कहना है:
* दोनों देशों के बीच बिजनेस बढ़ेगा।
* नई कंपनियों के लिए मौके खुलेंगे।
* लोगों को ज्यादा काम मिलेगा।
हालांकि, कुछ लोगों का ये भी मानना है कि इस डील पर आसपास के देशों की राजनीति का असर पड़ सकता है, जिससे एशिया के बाजारों में मुकाबला बढ़ सकता है।
आखिरी बात
ट्रंप ने ताइवान के साथ जो बिजनेस डील की है, वो पैसे और देश की सुरक्षा, दोनों के लिए जरूरी है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि इस डील का दुनिया के बिजनेस और आसपास के देशों पर क्या असर होता है।