भुवनेश्वर: साइबर अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से ‘डिजिटल अरेस्ट’ का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। यहाँ साइबर ठगों ने नालको (NALCO) के एक रिटायर्ड सीनियर अधिकारी और उनकी पत्नी को निशाना बनाकर करीब 35 घंटे तक बंधक (डिजिटल अरेस्ट) बनाए रखा।
आतंकवाद के नाम पर डराया
शिकायत के मुताबिक, ठगी का यह खेल 9 फरवरी को शुरू हुआ। पीड़ित दंपति को एक अनजान नंबर से कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को पटना का पुलिस अधिकारी बताया। जालसाज ने बेहद शातिर तरीके से उन्हें डराया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल ‘करीम खान’ नाम के एक कुख्यात आतंकवादी ने आतंकी गतिविधियों के लिए किया है।
35 घंटे का मानसिक टॉर्चर
अपराधियों ने दंपति को वीडियो कॉल के जरिए “डिजिटल अरेस्ट” कर लिया। उन्हें धमकी दी गई कि यदि उन्होंने कैमरा बंद किया या किसी से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
- डिमांड: आतंकियों से मिलीभगत का आरोप हटाने के बदले में 1 करोड़ रुपये की मांग की गई।
- तरीका: पुलिस की वर्दी और आधिकारिक दिखने वाले बैकग्राउंड का इस्तेमाल कर कपल को मानसिक रूप से इतना तोड़ दिया गया कि वे 35 घंटे तक अपने ही घर में कैद रहे।
सावधान रहें: ऐसे काम करता है ‘डिजिटल अरेस्ट’
डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि ठगी का एक नया तरीका है:
- फेक आइडेंटिटी: ठग खुद को CBI, ED या पुलिस अधिकारी बताते हैं।
- गंभीर आरोप: ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग या आतंकवाद जैसे गंभीर मामलों में फंसने का डर दिखाते हैं।
- वीडियो कॉल पर नजर: स्काइप या व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए आपको तब तक नजरबंद रखते हैं जब तक आप पैसे न दे दें।
याद रखें: कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करता और न ही पैसे की मांग करता है।
साइबर सुरक्षा टिप्स
- किसी भी अनजान कॉल पर अपनी निजी जानकारी या आधार नंबर साझा न करें।
- यदि कोई खुद को पुलिस वाला बताकर डराए, तो तुरंत फोन काटें और स्थानीय थाने से संपर्क करें।
- किसी भी साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत 1930 डायल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।