वास्तु उत्पादों का नहीं, ऊर्जा संतुलन का विज्ञान है

आज के समय में “वास्तु” शब्द सुनते ही अधिकांश लोगों के मन में पिरामिड, क्रिस्टल, धातु की पट्टियाँ, विंड चाइम, दर्पण या अन्य तथाकथित वास्तु उत्पादों की छवि उभर आती है। यह धारणा धीरे-धीरे इतनी प्रबल हो गई है कि लोग वास्तु के वास्तविक स्वरूप को भूलते जा रहे हैं।

सच्चाई यह है कि वास्तु किसी उत्पाद को खरीदने का विषय नहीं, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के बीच ऊर्जा के संतुलन का विज्ञान है। इसका मूल उद्देश्य भवन में उपस्थित प्राकृतिक ऊर्जाओं को इस प्रकार संतुलित करना है कि वहाँ रहने या कार्य करने वाले व्यक्ति को सकारात्मक, शांत और संतुलित वातावरण प्राप्त हो।

हमारा घर, कार्यालय या व्यापारिक प्रतिष्ठान केवल ईंट, पत्थर और सीमेंट से बनी संरचना नहीं है। प्रत्येक स्थान की अपनी ऊर्जा होती है, जो सूर्य के प्रकाश, वायु प्रवाह, दिशाओं, खुले स्थान, भार वितरण और स्थान के उपयोग से प्रभावित होती है। जब इन तत्वों में संतुलन स्थापित होता है, तब वातावरण अधिक सामंजस्यपूर्ण और सकारात्मक अनुभव होता है।

दुर्भाग्य से आज वास्तु का एक बड़ा हिस्सा बाज़ारवाद की भेंट चढ़ चुका है। छोटी-सी समस्या का समाधान भी महंगे उत्पादों में खोजा जाने लगा है। जबकि वास्तविक वास्तु विशेषज्ञ का पहला प्रयास भवन की संरचना, उपयोग और ऊर्जा प्रवाह का अध्ययन कर व्यावहारिक समाधान देना होता है, न कि उत्पादों की सूची थमा देना।

यह भी समझना आवश्यक है कि वास्तु कोई चमत्कार नहीं करता। सफलता का आधार आज भी परिश्रम, ईमानदारी, सही निर्णय और सकारात्मक सोच ही हैं। वास्तु केवल ऐसा वातावरण बनाने में सहायक हो सकता है, जहाँ व्यक्ति अपनी क्षमता का बेहतर उपयोग कर सके।

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम वास्तु को अंधविश्वास या बाज़ार में बिकने वाले उत्पादों से अलग पहचानें। वास्तु का वास्तविक स्वरूप संतुलन, सामंजस्य और प्राकृतिक ऊर्जा के उचित प्रवाह में निहित है।

जब हम उत्पादों के बजाय ऊर्जा के संतुलन पर ध्यान देंगे, तभी वास्तु का वास्तविक लाभ समाज तक पहुँचेगा। वास्तु का उद्देश्य वस्तुएँ बेचना नहीं, बल्कि जीवन और स्थान के बीच सामंजस्य स्थापित करना है। यही वास्तु का वास्तविक दर्शन है।

Deepak (Vastu Expert) From S-vastu Solution, www.svastusolution.com, 
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